राष्ट्रपति चुनाव है विपक्षी दलों के लिए अस्तित्व की लड़ाई: विजयवर्गीय

कोलकाता। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि ये चुनाव विपक्ष के लिए अपने अस्तित्व की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब से कई चुनावों में विपक्षियों को करारी हार मिली है तब से ही वो बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुटता की कोशिश कर रही हैं। यह कोशिश उनके खत्म हो रहे राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है।

 

बता दें कि विजयवर्गीय का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव में भी ऐसा ही होगा और इस चुनाव में भी उन्हें करारी हार मिलेगी क्योंकि विपक्षी खेमों में ही कुछ लोग ऐसे हैं जो बीजेपी का समर्थन करेंगे। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी मोर्चा तैयार करने के लिए सोनिया गांधी सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से मिल चुकी हैं और इसी सिलसिले में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से भी मुलाकात करेंगी। इस बारे में कैलाश ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारना चाहता है, इससे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मोदी जी के सामने इनकी रणनीति फेल हो जाएगी। हमारी राजनीति सबका साथ, सबका विकास करने की है जबकि विपक्ष तुष्टीकरण की राजनीति में भरोसा करता है।

वहीं जब विजयवर्गीय से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला एनडीए के सभी सहयोगी दल बीजेपी अध्यक्ष के सात बैठक कर तय करेगी। सहयोगी दलों को एक रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि न केवल सहयोगी पार्टियां बल्कि विपक्ष के लोग भी जानते हैं कि केवल मोदी हीं देश को बचा सकते हैं। इसीलिए सबका साथ जरूर मिलेगा। बीजेपी पर लगने वाले सांप्रदायिकता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब सीमा पर सैनिकों की हत्या होती है तो कोई भी पुरस्कार वापसी गैंग सामने आकर विरोध नहीं करता ना ही विपक्ष के नेता कैंडल मार्च निकालते हैं।

साथ ही विपक्ष पर आरोप लगाते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि ‘ये लोग पाखंडी और अवसरवादी हैं, मानवाधिकार के नाम पर आतंकवाद और देशद्रोह का समर्थन करना ही इनका एक मात्र धर्म है। ये दगाबाज लोग हैं। ‘कश्मीर मुद्दे पर बीजेपी पर लग रहे असफलता के आरोपों पर उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी भी कीमत पर देशहित से समझौता नहीं करेगी। कश्मीर के हालात को सेना और सरकार मिलकर सुधारेंगे।