किसानों से धान खरीदने में सरकार की दिलचस्पी नहीं : प्रेम कुमार

पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेम कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को किसानों से धान खरीदने में दिलचस्पी नहीं लेने के लिए उनकी सरकार को किसान विरोधी बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के धान खरीदने में सरकार की दिलचस्पी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इस कारण वे बिचैलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हो गए हैं। उन्होेंने कहा कि इस साल सूबे के 3. 5 लाख किसानों ने धान खरीदने के लिए निबंधन हेतु आवेदन दिया था, लेकिन केवल 1.30 लाख किसानों का ही निबंधन हो सका। उन्होंने पूछा कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो शेष 2.2 लाख किसान अपनी धान की फसल को कहां बेचेंगे ? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शुरू से किसानों की धान खरीदने में दिलचस्पी नहीं ले रहीं है।

15 नम्बर से किसानों से धान खरीद की घोषणा की गई थी। इस हिसाब से 56 दिन बीत जाने के बाद यानी 11 जनवरी तक केवल 80 हजार टन धान की खरीद हो सकी थी। सरकार ने इस साल धान खरीद का कोई लक्ष्य नहीं तय किया है, जब कि इस साल 30 लाख टन धान खरीदने की घोषणा की गई थी। वहीं, कछुए से भी धीमी गति से धान की खरीद होने से यहां के किसान परेशान हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि 7 हजार पैक्स में से मात्र 2100 पैक्स ही घान खरीद की जा सकती है यानी आधे से भी कम पैक्स इस बार धान खरीद सकते हैं। यानी 4900 पैक्स इस बार किसानों से धान खरीद नहीं रहे हैं। जहां सरकारी समर्थन मूल्य पर धान की कीमत 1470 रुपये है वहीं, धान खरीद नहीं हो पाने के कारण किसान 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल धान बाजार में बेचने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल भी किसानों को धान खरीद पर 300 रुपये बोनस भी दिया था, लेकिन इस बार किसानों को बोनस भी नहीं दिया गया है।

बता दें कि झारखंड में किसानों को प्रति क्विंटल धान खरीद पर 150 रुपये बोनस दिया गया वहीं भाजपा शासित राज्यों में सरकार ने समर्थन मूल्य 1470 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत दी जा रही है। उन्होंने पूछा कि जब भाजपा शासित राज्यों में किसानों से धान खरीदने में कोई परेशानी नहीं हो रही है तो सिर्फ बिहार में ऐसा क्यों हो रहा है । राज्य के किसान दोहरे मार से जूझ रहे हैं, पर सरकार पूरी तरह बेपरवाह बनी हुई है।