नोटबंदी से आलू किसान हुए परेशान

गाजीपुर। नोटबन्दी के बयालीस दिन बीतने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही खास तौर से आलू या सब्जी उगाने वाले किसान, व्यापारी और कोल्ड स्टोरेज मालिक सब परेशान हैं, पूर्वांचल के सबसे ज्यादा आलू पैदावार वाले जनपद गाजीपुर की हालत ये है कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसान और व्यापारी आलू लेने नहीं आ रहे।

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कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने बकायदा नोटिस भेज के आलू रखने वालों से अपील कर रखी है कि वो आलू ले जाएं, लेकिन इस आलू की बिक्री न होने से वो पड़ा रह जा रहा है, ऐसे में कोल्ड स्टोरेज मालिक आलू भेंड बकरियों को खिलवा दे रहे हैं या फिर आलू फेंकने पर विवश हैं क्योंकि उन्हें नए सीजन के लिए अपने स्टोर को तैयार भी करना है।

कोल्ड स्टोरेज व्यवसायी प्रदीप सिंह कहते है कि नोटबन्दी से आलू का भाव गिर गया सारे शीत गृह वाले परेशान हैं, किसान अलग परेशान है जितनी लागत लगी है उतना मिल नहीं पा रहा है, इसबार नगदी की कमी से आलू की बोवाई बिना खाद की हुई है।अब आलू रखने वालों की लागत तक नहीं निकल पा रही है क्योंकि नगदी की कमी है ऐसे में हम लोग आलू औने पौने दाम पर बेच रहे हैं, और फेंके भी जा रहे बस समझिए कि आलू हटा रहे हैं, कि अगले सीजन के लिए स्टोर तैयार कर सकें, नोट बन्दी का सीधा असर किसानों और कृषि व्यसायियों पर पड़ा है।

वहीं किसान और व्यवसायियों का कहना है कि नोटबन्दी का असर पड़ रहा है, नोट नहीं मिल रहा है तो ये बिक नहीं रहा है, फेंका जा रहा है जानवर खा के पेट भर चुके हैं अब जानवर भी नहीं खा रहे, जीउत कहते हैं कि नोट बन्दी से बरबाद हो गये, कोई खरीद ही नहीं रहा, तो कूड़े पर फेंका जा रहा है, बरबादी हो गयी, वहीं रामकृत कह रहे हैं कि मैं स्टोर में आलू रखा था नोटबन्दी हो गयी, पैसा मिला नहीं, हम किराया जमा नहीं किए सब इसी में पड़ा रहा, आज भी नहीं निकला तो सब फेंका जा रहा है, नोट बन्दी नहीं हुआ होता तो रेट मिला होता, यही परेशानी हो गयी।

आलोक त्रिपाठी, संवाददाता