उत्तराखंड और हिमालय से है पीएम मोदी का पुराना कनेक्शन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देवभूमि उत्तराखंड के धरती पर बाबा केदार नाथ के दर्शन और पूजन के साथ नई परियोजनाओं के प्रोजेक्टों को लेकर पांच महीने बाद फिर बाबा के दर्शन को आये। इस अवसर पर पीएम मोदी ने बाबा केदारनाथ का दर्शन और पूजन करने के बाद वहां कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान लोगों को सम्बोधित करते हुए, अपने कई अनुभवों को भी सबके साथ साझा किया। पीएम मोदी ने कहा कि साल 2013 में जब प्राकृतिक आपदा से पूरा उत्तराखंड जूझ रहा था। उव वक्त मै गुजरात का मुख्यमंत्री था, तत्कालीन सरकार को सूबे में पुनर्निर्माण की परियोजनाओं में सहयोग की पेशकस की थी। लेकिन राजनीतिक दबाव में राज्य सरकार ने पेशकस ठुकरा दी थी।

लेकिन जनता और बाबा ने सेवा का अवसर हमें दिया तो हम बाबा के दरबार में सेवा के लिए हाजिर हैं। सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों की सेवा ही बाबा केदारनाथ की सच्ची सेवा है। इस दौरान पीएम मोदी ने हिमालम की गोद में बिताए दिनों को भी याद किया। उन्होने कहा कि एक वक्त था कि मैं इन वादियों के रंग में रम गया था। हिमालय की इस विशाल गोद में भटका हुआ मैं यहां के हर चेतना को महसूस कर सकता हूं। पहले प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काफी वक्त हिमालय की गोद में बिताया है। ये वो वक्त था जब प्रधानमंत्री मोदी एक आम नागरिक के तौर पर जीवन यापन कर रहे थे। ये प्रधानमंत्री मोदी का अज्ञातवास का काल था। हमें बिताए गये दिनों का जिक्र खुद पीएम मोदी कई बार मंचों से कर चुके हैं।

साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद चारधाम यात्रा के प्रमुख तीर्थ स्थलों में केदारनाथ और ब्रद्रीनाथ तबाह हो गए थे। इसके बाद से इस इलाके में पर्यटन को लेकर भारी कमी आई थी। मौजूदा उत्तराखंड सरकार और सूबे का पर्यटन विभाग आपदा के बाद से अब फिर पर्यटन के क्षेत्र में कई कवायद शुरू कर रहा है। इसी कवायद के तहत पीएम मोदी ने यात्रा का श्री गणेश बीते 5 पांच पहले किया था। अब समापन पर आकर पीएम ने यहां के पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधान सभा अध्यक्ष और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। यात्रा का पूरा आयोजन सूबे के पर्यटन विभाग ने किया । इस यात्रा को पर्यटन सचिव आर मिनाक्षी सुन्दरम् ने कॉर्डिनेट किया है । इस यात्रा की सभी जिम्मेदारियां आर मिनाक्षी सुन्दरम् को सौंपी गई थीं।