भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर लोकसभा से देश को दिलाया पीएम मोदी ने संकल्प

नई दिल्ली। आज के दिन देश के लिए सबसे गौरव शाली है । महात्मा गांधी ने आज के दिन देश को आजाद कराने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन के तौर पर करो या मरो आंदोलन बनाया था। इस आंदोलन का ही स्वरूप था कि 5 सालों में हम आजाद हुए। बापू ने कहा था कि पूर्ण स्वतंत्रता से कम हम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करेंगे। 14 जुलाई 1942 को इस आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इसको लेकर व्यापक चर्चा के बाद निर्णय लिया।

भारत का आजाद होना भारत की आजादी नहीं थी। ब्रिटिश उपनिवेशवाद का आरम्भ भारत से हुआ था और इस आंदोलन के बाद भारत ही नहीं उपनिवेशवाद से ग्रसित सभी राष्ट्र मुक्त हुए। ये आंदोलन भारत की इच्छा शक्ति का परिणाम था। जब हम संकल्प लेकर एक लक्ष्य के लिए जुट जाते हैंऔर देश में एक नये लक्ष्य को पाने के लिए एक हो जाते हैं। तो हर मुश्किल वक्त को आसानी से खत्म कर देते हैं। इस आंदोलन और इस बात की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर इस आंदोलन के साथ राष्ट्र के नव निर्माण का संकल्प लेने का संदेश दिया।

आंदोलन के पुरोधा थे बापू संकल्प से सिद्धि की ओर लेकर गये

इस दौरान उन्होने गांधी जी द्वारा खड़ा किए गये इस आंदोलन का जिक्र एक कवि की रचना से भी किया उन्होने सोहनलाल द्विवेदी की कविता का दो पंक्तियां पढ़ीं जिसमें लिखा था…चल पड़े जिधर दो डगमग में बढ़ गये उधर ही कोटि पग गड़ गई जिधर भी एक दृष्टि गड़ गये उधर ही कोटि दृग उन्होने कहा कि ये कविता में बापू के सामर्थ्य के साथ देशवासियों का क्षमताओं का वर्णन है। अगर सभी देखवासी एक साथ खड़े हो जाये तो कुछ भी असम्भव नहीं होगा। आज भी हमारे पास गांधी है क्योंकि सवा सौ करोड़ देश वासियों के विश्वास के साथ अगर हम सब गांधी के और सभी स्वतंत्रता सेनानियों सपनों को पूरा कर देश में विकास की एक नई हार दिखा सकते हैं। आज फिर से एक बार 2017 में विश्व में वो अनुकूलता है जो 1942 में थी जिसके बाद 5 सालों में हमने आजादी ली थी। इस आजादी के साथ हमने विश्व से उपनिवेशवाद को खत्म करने का शुरूवात की थी।

आज देश को अव्यवस्थाओं के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा

आज विश्व हमें देख रहा है। इसलिए हमें दल से उपर उठ कर राजनीति से उपर उठ कर राष्ट्रनीति पर चलें और हम सब के ऊपर सवा सौ करोड़ देश वासी होते हैं। हम इस बात से इनकार नहीं करना होगा कि भ्रष्टाचार पूरी दीमक ने देश को खोखला कर रखा है। कल तक जो हुआ किसने क्या किया इस पर विवाद के लिए बहुत समय है लेकिन वर्तमान में देश के सामने हम आज के इस पर्व से ईमानदारी तो दिखा सकते हैं। देश में फैली अशिक्षा, कुपोषण और गरीबी जैसी भयावह स्थितियों से हम सबको एक साथ मिलकर लड़ना होगा। 1942 में देश में अलग-अलग विचार धाराएं थी लेकिन अंग्रेजी उपनिवेशवाद के खिलाफ सभी दलों ने एक साथ आकर गांधी के नेतृत्व में आजादी की जंग छेड़ी । आज फिर समय की मांग है कि हम सभी साथ होकर अशिक्षा, कुपोषण और गरीबी जैसी स्थितियों से निपटें। गांधी के सपनो को साकार करने के लिए उनकी ग्राम स्वराज का सपना आज पीछे छूट गया है। गांधी के मन के भीतर जो गांव गरीब किसान शोषित पीड़ित वंचित सभी के लिए कुछ करने का विचार था उसको लेकर हम सभी को इस पार हो उस पार हों सभी को संकल्प लेना होगा। हमें अपने कर्तव्यभाव को सामने लेकर आना होगा। हमें कर्तव्यभाव को अपने जीवन में जगाना होगा।

कानून को तोड़ने के पहले अपने कर्तव्यों को याद करना जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने लंचिंग का जिक्र करते हुए भीड़ द्वारा होने वाली हिंसा और स्वच्छ भारत अभियान का भी जिक्र करते हुए कहा कि हमें कानून का भय नहीं है हम अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं। सवा सौ करोड़ देशवासियों को संकल्प लेना होगा आज इस आजादी के आंदोलन के 75 वी वर्षगांठ पर कि देश में अराजकता और अपनी विकृत मानसिक सोच को बदलेंगे। स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र करते हुए भी मोदी ने कहा कि आजादी के 70 सालों के बाद भी देश में कई गांव आज भी शौचालय नहीं है हमारी मां बेटियों को शौच करने के लिए रात के अंधेरों का इन्तजार कराना पड़ता है। क्योंकि लोगों की मानसिकता खराब हो गई है। हमें अपनी मानसिक सोच बदलनी होगी देश में एक नई ऊर्जा का संचार कर शिक्षा के स्तर को विकसित करते हुए अपनी मानसिक सोच को बदलाना होगा। देश की माताओं और बहनों की भागीदारी देश के विकास को बढ़ा सकती है। देश को आजादी दिलाने में भी इनका योगदान व्याप्क रहा है। आज भी उनको आगे लाना होगा।

प्रवल इच्छा शक्ति से मिली थी आजादी

1857 से 1942 तक देश में आजादी को लेकर अलग-अलग माहौल था देश में अलग-अलग धाराएं थी । लोग कभी हिंसा तो कभी अहिंसा के रास्ते से आजादी की लड़ाई से जूझ रहे थे। अलग-अलग विचार थे लेकिन उद्देश्य एक था। लेकिन सभी 1942 में एक साथ आकर जुड़ गये। इसके बाद 1942 से 1947 पांच सालों में सारे लोगो एक नेतृत्व के साथ मिलकर आगे आये और देश को आजादी मिली आज हम सबको ये संकल्प लेना चाहिए कि हम एक साथ मिलकर देश में भ्रष्टाचार और अशिक्षा, कुपोषण, गरीबी, शोषित, पीड़ित, वंचितों के लिए एक साथ उठ खड़े होना है।

दुनियां बदलाव की ओर है हमें भी इस यात्रा में साथ चलना होगा

हम पिछले 200 सौ सालों का इतिहास देखें तो 40 से 50 सालों में दुनियां में बड़ा बदलाव आया है। हमें उस बदलाव के साथ चलना होगा। विश्व में विकास की यात्रा के साथ में हमें अब चलना होगा। देश को दुनियां के साथ खड़ा करने के लिए 2017 से 2022 तक आजादी की लड़ाई के 75 पूरे होने पर और आजादी के 75 साल पूरे होने के फासले के 5 सालों में जब हम देश को आजादी के लिए शहीदों के सपने का भारत खड़ा करेंगे तो उनके लिए और सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए सच्ची सेवा पर पायेंगे। इसके लिए हमें पूरी लगन के साथ खड़ा होना होगा। ये वही लगन होनी चाहिए जिस लगन ने देश को 1942 से 1947 तक में आजादी की लड़ाई लड़कर भारत को आजादी दिलाई। इस आंदोलन के कारण दुनियां के कई देशों को आजादी मिली थी आज भी देश के साथ विश्व भारत की ओर आंखें लगाए देख रहा है। विश्व नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रहा है।

राजनीति से बड़ी राष्ट्रनीति है साथ मिलकर लें संकल्प

हमें एक सामूहित इच्छाशक्ति जगाकर कुछ मुद्दों पर साथ होकर जैसे जीएसटी की सफलता किसी सरकार की सफलता किसी दल या सरकार की सफलता नहीं है। ये सफलता इस सदन के सभी दलों को जाता है। जीएसटी विश्व के लिए बड़ा अजूबा है। अगर ये निर्णय ये देश कर सकता है तो कुछ भी कर सकता है। महात्मा गांधी ने नारा दिया था करो या मरो आजादी लो और हमने साथ मिलकर साथ चलकर आजादी ली थी। हमें साथ मिलकर 2017 से 2022 तक में ये संकल्प लेकर पूरा करना होगा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम सभी देशवासी और जन प्रतिनिधियों भ्रष्टाचार को मिलकर खत्म करेंगे करके रहेंगे…गरीबी को उनका अधिकार दिलायेंगे औऱ दिलाकर रहेंगे…नवजवानों को स्वरोजगार के अवसर देगें और देकर रहेंगे …देश से कुपोषण को खत्म करेंगे कर के रहेंगे… महिलाओं को आगे बढ़कर रोकने वाली बेड़ियों को खत्म करेंगे करके रहेंगे…अशिक्षा को देश से दूर करेंगे करके रहेंगे..आज के हिन्दुस्तान में जब हम आजादी के आंदोलन की 75 वी वर्षगांठ ये संकल्प लेकर उसी लगन से संकल्प से सिद्धि के ये 5 सालों के जीयें और सफलता के लिए प्रयत्न करें तो आजादी के दीवानों का सपना आजादी के 75 वें साल को पूरा करेंगे। सपने सामर्थ्य संकल्प और सिद्दी को प्राप्त करें।

अजस्र पीयूष