गर्भपात कराने के लिए महिला ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

नई दिल्ली। कोलकाता की एक गर्भवती महिला ने अपना 24 महीने का गर्भपात कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिला की याचिका के बाद सात डॉक्टरों के पैनल को गठित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पैनल को गठित कर इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि एक्ट में भ्रूण हत्या के साथ मां की जिंदगी का भी ख्याल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर बच्चा पैदा होता है और वह पैदा होने के बाद कोमा में चला जाता है या फिर बच्चे में किसी प्रकार का कोई बदलाव और हरकत नहीं देखी जाती तो मां अपनी ही नजरों में गिरने लग जाती है ऐसे में मां की जिंदगी ज्यादा अच्छी नहीं बचती है और बाद में उसे पच्छतावा ही होता है। सुप्रीम कोर्ट ने सात डॉक्टरों के पैनल का गठित करके इस मामले में जांच कर 29 जून तक रिपोर्ट को सौंपने की बात कही है।

जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली महिला की उम्र 33 साल बताई जा रही है। ऐसे में उसके पेट में जो बच्चा पल रहा है वह किसी बिमारी का शिकार है। महिला का आशंका है कि उसका बच्चा जब पैदा होगा तब वह नहीं बच पाएगा जिसके बाद महिला ने गर्भपात कराने का फैसला लिया है। वही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों की टीम का गठन करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

महिला की तरफ से बुधवार को कहा गया है कि उसे 25 मई को इस बात का पता लगा है उसके गर्भ में पल रहे बच्चा दिल से जुड़ी हुई बिमारी का शिकार है। ऐसे में 30 मई को फिर से महिला ने अपनी जांच कराई। इस बार हुई जांच में यह पुष्टि हो गई कि बच्चा दिल से जुड़ी किसी समस्या का शिकार है। हालांकि जब तक इस बात का पता पीड़िता को लगा तब तक काफी देर हो चुकी थी और तब तक उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को 20 हफ्ते बीत चुके थे। सुप्रीम कोर्य में दायर याचिका में कहा गया है कि बच्चे की बचने की कम उम्मीद है।