मौनी अमावस्या में लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी, जानिए क्यूं है ये खास

नई दिल्ली। आज देश भर में मौनी अमावस्या का उत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन स्नान करने के लिए सबसे ज्यादा फलदायी जगहों में से सबसे पहले पहला प्रयाग आता है। उसके बाद हरिद्वार, जो गंगा नदी के तट पर है। गोदावरी नदी के तट पर नासिक और शिप्रा नदी के तट पर उज्जैन आता है। इस दिन सूर्य तथा चन्द्रमा गोचरवश मकर राशि में आते हैं। इसलिए यह दिन एक संपूर्ण शक्ति से भरा हुआ और पावन अवसर बन जाता है इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है।

इसलिए भी इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मकर राशि, सूर्य तथा चन्द्रमा का योग इसी दिन होता है अत: इस अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है. इस दिन पवित्र नदियों व तीर्थ स्थलों में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैइस दिन व्यक्ति विशेष को मौन व्रत रखने का भी विधान रहा है। इस व्रत का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए।

धीरे-धीरे अपनी वाणी को संयत करके अपने वश में करना ही मौन व्रत है। कई लोग इस दिन से मौन व्रत रखने का प्रण करते हैं। वह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि कितने समय के लिए वह मौन व्रत रखना चाहता है। कई व्यक्ति एक दिन, कोई एक महीना और कोई व्यक्ति एक वर्ष तक मौन व्रत धारण करने का संकल्प कर सकता है। मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करने चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करना चाहिए अथवा घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है। स्नान करते हुए मौन धारण करें और जाप करने तक मौन व्रत का पालन करें।

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व

– इन चारों जगह चार-चार के उपरान्त कुंभ लगता है क्योंकि कुंभ मेले का अलग-अलग महत्व होता है।

– इस एक महीने का जो जीवन होता है वो संयास से परिपूर्ण होता है। यह देखा जाता है कि ये कल्पवाश जो माघ की पूर्णिमा तक चलता है। माघी पूर्णिमा तक स्नान करते हुए अपना एक महीना वहां गुजारते हैं अर्थात जो माघी पूर्णिमा होगी वो 10 फरवरी दिन शुक्रवार को होगी, जिसमें नक्षत्र में प्रात:काल स्नान का विशेष महत्व होगा।

– जब चांद आकाश में नहीं होता है क्योंकि उस दिन विभिन्न प्रकार के दैवीय आपदाओं से मुक्ति मिलती है और अपने मोक्ष की तरफ कोई भी जातक अग्रसर होता है।
– शास्त्रों में लिखा गया है कि गंगा पाप को दूर करती है और स्वर्ग में कलपतरू वृश्र है जो सर्व प्रकार की दैन्य और दुखता का निवारण करता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि अमावस्या का विशेष महत्व है गंगा यमुना के तट पर स्नान करने से व एक महीना गुजारने से मोश्र पाता है।

– इसके अलावा एक दिन का समय भी वहां गुजारने से भी समस्त पापों के नाश होता है।

– इसके साथ ही गंगा में स्नान के उपरान्त विभिन्न चीजों के दान का भी अलग महत्व होता है जिसमें तिल और तिल से बने मिष्ठान, अपने एक दिन का भोजन किसी जरूरतमंद, किसी ऋषि मुनि या गरीब को देने से इसके अन्नत फल प्राप्त होते हैं।

– आध्यातमिक रूप से सुदृढ़ होने का ये त्योहार आंतरिक शान्ति प्रदान करता है।

– इसके अलावा स्नान के उपरान्त तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शान्ति मिलती है।

– इसके साथ ही इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। -मौनी अमावस्या एक पौराणिक त्योहार है जिसका धार्मिक रूप से अत्यधिक महत्व है।

 (राजेश त्रिपाठी, प्रोफेसर दर्शन एवं ज्योतिष, दिल्ली यूनिवर्सिटी)