करोड़ों खर्च करने के बाद भी लोगों को नहीं मिला गंगा का साफ पानी

पाकुड़। झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर पांच वर्ष पूर्व 31.61 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई शहरी जलापूर्ति योजना का लाभ जिला मुख्यालय के लोगों को आज तक नहीं मिल पाया है। मेसर्स डोसियन वेल्या वाटर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद की सुस्ती के चलते पाकुड़ शहर के लोग अब तक गंगा के शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकुड़ नगर परिषद की अध्यक्ष मीता पांडेय ने वर्ष 2008 में झारखंड हाईकोर्ट में पीआइएल दायर कर पाकुड़ जिला मुख्यालय के लोगों को गंगा का पानी उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई थी, जिस पर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सरकार को पाकुड़ जिला मुख्यालय को शीघ्र ही शुद्ध पेयजल आपूर्ति कराए जाने का निर्देश दिया था। सरकार के आदेश पर पीएचइडी ने 35 करोड़ की लागत से योजना तैयार कर सरकार को सौंपा। इस पर सरकार ने 31.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। योजना उपरोक्त कंपनी को आवंटित भी कर दी गई लेकिन काम की धीमी गति तथा विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक काम पूरा नहीं हुआ।

बता दें कि योजना के मुताबिक पश्चिम बंगाल के पुठीमारी फरक्का फीडर कैनाल से गंगा का पानी लाया जाना था, जो सदर प्रखंड के बल्लभपुर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचकर शुद्धिकरण के बाद पाकुड़ शहरवासियों को आपूर्ति की जानी थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ गंगा पर करोड़ो खर्च करने के बाद भी साफ पानी नहीं मिला। गंगा पर इतना खर्च करने के बाद भी उसका काम इतना धीमा चल रहा है कि लगता है सालों तक लोगों को साफ पानी मिलना मुश्किल है। झारखंड उच्च न्यायालय ने पांच साल पहले 31.61 करोड़ों रूपये की लागत से शुरू की गई थी जिसका काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।