मकर संक्रांति पर सूर्य देवता को दें अर्घ्य…करें मांगलिक कार्यों की शुरुआत

नई दिल्ली। खुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में यह त्यौहार अलग-अलग नाम और परम्परा के अनुसार मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल एक ही तारीख यानि कि 14 जनवरी को मनाया जाता है। हालांकि इस त्योहार को असम में बिहू और दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है।

इस दिन लोग खिचड़ी बनाकर भगवान सूर्यदेव को भोग लगाते हैं, जिस कारण इस पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह- सुबह पवित्र नदी में स्नान कर तिल और गुड़ से बनी चीजों को खाने की परंपरा है। इस पवित्र पर्व के अवसर पर पतंग उड़ाने का अलग ही महत्व है। बच्चे पतंगबाजी करके खुशी और उल्लास के साथ इस त्यौहार का भरपूर लुत्फ उठाते हैं।

इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और गीता के अनुसार जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है, वह श्री कृष्ण के परम धाम में निवास करता है। इस दिन लोग मंदिर और अपने घर पर विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। इस दिन बनारस, इलाहाबाद और गंगासागर में आस्था की डुबकी लगाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जमा होते है। लेकिन इन सभी तीर्थ स्थलों में सबसे ज्यादा महत्व गंगासागर का है।

आज से इलाहाबाद में शुरु होता है माघ मेला:-

देशभर में इस त्योहार को लेकर लोग काफी उत्साहित रहते है। इलाहाबाद में इस पर्व से माघ मेले के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन से ही इलाहाबाद में माघ मेले की शुरुआत होती है। ऐसा कहा जाता है 14 जनवरी के बाद से ही आप किसी मांगलिक कार्य को कर सकते हैं। माघ मेले का स्नान मकर संक्रांति से शुरु होकर शिवरात्रि तक यानि आखिरी नहान तक चलता है।