कारगिल युद्धः जब हमने पाकिस्तानी सेना को चटाई थी धूल

26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को पाकिस्तानी घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में ‘26 जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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26 जुलाई 2015 को पूरा देश 16वां विजय दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस दिन भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर जीत हासिल की थी, वह तारीख थी 26 जुलाई 1999 और दिन था सोमवार। पाक सेना ने इस दौरान कारगिल के कुछ भूभाग पर कब्जा करने के बाद उनके कब्जे वाले हिस्से में पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल चोटियों पर एक रात गुजारी थी।

इस बात का खुलासा पाकिस्तान के एक रिटायर्ड कर्नल अशफाक हुसैन ने अपनी किताब ‘विटनेस टू ब्लंडरः कारगिल स्टोरी अनफोल्ड’ में किया। हुसैन की यह किताब 2008 में छपी थी। उसने कहा था कि कारगिल सेक्टर में 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक हेलिकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय भू-भाग में करीब 11 किमी अंदर एक स्थान पर एक रात भी बिताई थी। इससे यह बात साफ हो गई थी कि परवेज मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध में एक सक्रिय भूमिका निभाई थी।
अलग-अलग साक्ष्यों की माने तो लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अजीज ने कहा कि पाक सेना के तत्कालीन चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ ने पूरे मामले को दबा दिया। लेकिन फिर भी वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए जिम्मेदार हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। मुशर्रफ और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस लड़ाई के बारे में जानते थे। मुशर्रफ खुद नक्शों के साथ नवाज शरीफ से मिलते थे।

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