चाबहार समझौते ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता

chabhar_agreementइस्लामाबाद। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच चाबहार बंदरगाह के विकास को लेकर हुए समझौता पाक के लिए चिंता की वजह बन गया है। पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह पर भारत, अफगानिस्तान और ईरान का त्रिपक्षीय गठजोड़ पाकिस्तान के लिए सुरक्षा खतरा है और सरकार को अलग-थलग पडऩे से बचने के लिए कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए।

स्थानीय बौद्धिक संस्थान स्ट्रटेजिक विजन इंस्टीटयूट (एसवीआई) द्वारा मंगलवार को आयोजित एक सेमिनार में दो पूर्व लेफ्टिनेंट जनरलों ने यह राय रखी, जो पहले रक्षा सचिव भी रह चुके हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के अनुसार विशेषज्ञों के विचार पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान की राय झलकाते हैं, जिसे चाबहार बंदरगाह और व्यापार मार्ग पर गहरा संदेह है। पूर्व रक्षा सचिव लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आसिफ यासीन मलिक ने सेमिनार में कहा कि भारत-अफगानिस्तान-ईरान के बीच गठजोड़ पाकिस्तान के लिए सुरक्षा खतरा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ जाने की आशंका पैदा हो गई है। पूर्व ले. जन. मलिक ने कि क्षेत्रीय और वैश्विक माहौल को देखते हुए मैं पाकिस्तान को अलगाव के रसातल में घुसते देख रहा हूं, जिसकी प्रमुख वजह उसकी खुद की गलतियां हैं और दूसरे देशों की विरोधी नीतियां भी आंशिक रूप से जिम्मेदार हैं।

सेमिनार में मौजूद एक अन्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नदीम लोधी ने कहा कि हमारे पड़ोस में इस तरह का भयावह गठजोड़ होना पाकिस्तान के लिए अशुभ है और इसके दूरगामी परिणाम होंगे।