चौथे दिन भी माउंट आबू के जंगलो में सुलग रही है आग

माउंट आबू। माउंट आबू सेंचुरी में 14 अप्रैल सुबह भड़के दावानल पर चौथे दिन 17 अप्रैल सुबह तक वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर्स और वन, सीआरपीएफ, आर्मी, प्रशासन के कार्मिकों और स्थानीय लोगों की मदद से काफी हद तक काबू पा लिया गया है। प्रशासन के इस दावे की पुष्टि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 17 अप्रैल की फॉरेस्ट फायर रिपोर्ट भी कर रही है। जिसके अनुसार 16 अप्रैल रात 2 बजे तक सेटेलाइट में सिरोही जिले में मात्र 4 फॉरेस्ट फायर प्वाइंट ही नजर आ रहे थे।

माउंट आबू के इतिहास में यहां के जंगलों में इतनी भयंकर आग अब तक किसी ने देखी नहीं थी। इसलिए आग की भयावहता को देखते हुए डीएफओ का हेलीकाप्टर का उपयोग करने के सूझबूझ भरे निर्णय ने इस पर सही समय पर काबू पाने में काफी मदद की। जिला कलेक्टर अभिमन्यु कुमार ने बताया कि दावानल पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है और वायुसेना के हेलीकॉप्टर्स को वापस भेज दिया गया है। डीएफओ ने बताया कि लेंटाना और पतझड़ के मौसम में गिरे सूखे पत्तों की वजह से यह आग ज्यादा तेजी से फैली।

सीसीएफ जीएस भारद्वाज, डिविजनल कमिश्नर रतन लाहोटी, जिला कलेक्टर अभिमन्यु कुमार आदि अभी भी माउंट आबू में ही हैं। स्थिति काबू में रही तो शाम तक यह लोग भी प्रस्थान कर जाएंगे। वैसे 3 दिन से माउंट आबू में भागदौड़ के बाद एडीएम जवाहर चौधरी प्रशासनिक कामकाज निपटाने के लिए सिरोही आ गए हैं। 14 अप्रैल को माउंट आबू की अनादरा की तरफ की पहाडियों में फैली आग 15 और 16 को आबूरोड-माउंट आबू रोड तक बढ गई थी। कई बार आग दौडती हुई सडक पर भी पहुंच गई। इसे बुझाने के लिए कई बार इस मार्ग पर यातायात को रोकना पड़ा।

आग की भयावहता को देखते हुए माउंट आबू पहुंचे सीसीफ वाइल्डलाइफ जीएस भारद्वाज ने जोधपुर में फायर लाइन काटने की ट्रेनिंग ले रहे वनकर्मियों को भी बुलवाया। इसके अलावा बाडमेर, पाली और गुजरात के दांतीवाडा प्रोजेक्ट के वनकर्मियों को भी जंगल की आग पर काबू पाने के लिए बुलवाया गया। दावानल पर लगभग काबू पा लिया गया है। शुक्रवार की बनिस्पत सोमवार सुबह तक इस दवानल पर 95 प्रतिशत तक काबू पा लिया गया है। जिला कलेक्टर ने बताया हवा के कारण छिटपुट स्थानों पर आग अब भी सुलग रही है। इसे विभिन्न विभागों के कार्मिकों के सहयोग से बुझाने का प्रयास किया जा रहा है।

भयावह आग के कारण शुक्रवार और शनिवार को आग पर काबू पाने के लिए बुलवाए गए वायुसेना के हेलीकॉप्टर्स को वापस भेज दिया गया है। दुर्गम घाटियों और मानव पहुंच से दूर स्थानों पर आग फैलने के कारण वन विभाग और प्रशासन को हेलीकॉप्टर से दावानल को बुझाने के लिए मदद लेनी पड़ी। राजस्थान में हेलीकॉप्टर से जंगल की आग को बुझाने का इतना लम्बे समय तक पहली बार इस्तेमाल किया गया है। वैसे पिछले पखवाडे उदयपुर की जिरवा घाटी में हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन वहां आग इतनी वृहद स्तर पर नहीं फैली थी कि चार दिन तक वायुसेना को हेलीकॉप्टर से इसे बुझाने के लिए पानी डालना पडे।

माउंट आबू सेंचुरी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित राजस्थान की सबसे बडी सेंचुरी में से एक है। इसके बावजूद यहां पर वन विभाग के पास आग बुझाने के समुचित संसाधन तक नहीं हैं। माउंट आबू नगर पालिका के पास भी बड़ा अग्निशमन वाहन नहीं है। जिससे आग लगने पर आबूरोड और आसपास की निजी संस्थाओं की ओर मुंह ताकना पडता है। वैसे इस बार बडी आग से सबक लेकर आबू पर्यावरण समिति के माध्यम से यह खरीदने का फैसला लिया गया है।