नोटबंदी ने गिराई भारत की विकास दर, दर्ज की गई एक प्रतिशत की गिरावट

नई दिल्ली। नोटबंदी के कारण भारत की विकास दर में पिछले साल के मुकाबले इस साल एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय सांख्यिकी विभाग आंकड़े जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी है कि नोटबंदी के कारण इस साल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में पिछले साल के 8 प्रतिशत के मुकाबले इस साल वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत है। जिससे भारत के विकास दर में गिरावट आई है।

विकास दर पर दिखा नोटबंदी का असर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में जनवरी से मार्च के बीच भी, पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले विकास दर गिर कर 6.1 प्रतिशत पर आ गई। अर्थव्यवस्था में गिरावट का सबसे बड़ा कारण पिछले साल के अंत में भारत सरकार द्वारा की गई नोटबंदी रही है। जिसकी वजह से भारत की विकास दर में गिरावट आई है। जनवरी से मार्च की तिमाही के दौरान बाज़ार में नक़दी का संकट पैदा हो गया था जिसकी वजह से उपभोक्ता सामानों की बिक्री कम हो गई थी। साथ ही लोगों को काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा था।

बता दें कि अर्थशास्त्रियों का कहना था कि ये तो हम जानते हैं कि नोटबंदी से जीडीपी में कमी आएगी लेकिन इतनी कमी आएगी इसका अंदाजा किसी को नहीं था। पिछले वित्तीय वर्ष के पहले तिमाही के 7 प्रतिशत के मुकाबले चौथी तिमाही में विकास दर 6.1 प्रतिशत दर्ज की गई। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि ये आंकड़ा और भी बुरा हो सकता था, लेकिन भारत में जीडीपी की गणना में छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्रों के आंकड़े शामिल नहीं किए जाते हैं।

नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी और उनके आंकड़े शामिल न होने से वास्तविक स्थिति का अंदाज़ा अभी नहीं लगाया जा सकता। पिछले साल 9 नवंबर से 500 और 1000 रुपये के बड़े नोटों को बंद किए जाने के कारण विनिर्माण, मैन्यूफ़ैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों पर काफ़ी असर पड़ा था। इसके साथ ही नोटबंदी के कारण और भी कई व्यवस्थाएं गड़बड़ाई हैं।