नोटबंदी आज की परेशानी, कल की खुशहाली : नित्यानंद राय

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार के बाद ही तय हो गया था कि बिहार भाजपा में बदलाव तय है। भाजपा ने मंगल पांडेय को हटाकर बिहार से उजियारपुर के सांसद नित्यानंद राय के हाथों में बिहार भाजपा का नेतृत्व सौंप दिया है। पार्टी लाइन पर चलते हुए राय ने नोटबंदी को भविष्य के लिए खुशहाली लाने वाला बताया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा ने पिछड़ी जातियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बिहार की कमान राय को सौंपी है। वह कहते हैं कि राज्य सरकार की नाकामियों को लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से आज की परेशानी मगर भविष्य की खुशी के लिए है। बिहार भाजपा में गुटबंदी के प्रश्न पर उन्होंने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि बिहार भाजपा में किसी प्रकार की गुटबंदी नहीं है।

अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पटना पहुंचे नित्यानंद ने कहा कि जनसंघ के जमाने से लेकर आज तक के पार्टी अध्यक्षों के आंगन की मिट्टी लाकर बिहार भाजपा के नए कर्यालय की नींव रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्यालय भवन निर्माण की तैयारी काफी महीनों से चल रही है। बकौल नित्यानंद, “भाजपा को इस ऊंचाई तक लाने के लिए सभी अध्यक्षों ने परिश्रम किया है, सभी कार्यकर्ताओं ने अपना तन-मन-धन झोंका है।”

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बिहार जैसे पिछड़े राज्य में ‘कैशलेस इंडिया’ का सपना कैसे पूरा होगा? इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत कैशलेस होना सचमुच आसान नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत हो गई है। यह कार्य होगा ही नहीं, यह सोचकर बैठ जाना सही नहीं है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि कैशलेस समाज बनाने का दायित्व केवल केंद्र सरकार की जिम्मेवारी नहीं है, राज्य सरकार और समाज के प्रत्येक व्यक्ति का इसमें योगदान होना चाहिए। उन्होंने नोटबंदी के बाद लोगों के सामने आ रही परेशनियों के विषय में पूछे जाने पर कहा कि लोग यह परेशानी भविष्य की खुशी के लिए है। आज लोग परेशानी झेलकर भी नोटबंदी के समर्थन में हैं। देश के अधिकांश युवा इस फैसले को लेकर उत्साहित हैं। कुछ लोग जो नोटबंदी का समर्थन नहीं कर रहे हैं, उनके विषय में लोग जानते हैं।

उन्होंने कहा, “बिहार संगठन को और मजबूत करने का दायित्व मुझे मिला है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन अैर समर्पित कार्यकर्ताओं के सहारे उसे दायित्व को पूरा करेंगे।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों को धोखा बताते हुए राज्य सरकार को चुनौती देते हुए नित्यानंद कहते हैं, “राज्य सरकार एक भी निश्चय का नाम गिनाए, जिसमें केंद्र सरकार का पैसा न लगा हो।” उन्होंने महागठबंन की सरकार के सात निश्चयों पर तंज कसते हुए कहा कि आज बिहार में सात निश्चय हत्या, लूट, अपहरण, दुष्कर्म, भ्रष्टाचार और विद्वेष हो गया है।

उन्होंने कहा कि एक साल पूर्व हुए बिहार विधानसभा चुनाव में लोगों को गुमराह कर महागठबंधन की सरकार सत्ता में आ गई, आज अगर चुनाव हो जाए, तो महागठबंधन को सही स्थिति का भान होगा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में तो अब दरार आ चुकी है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से करीबी रिश्ता रखने वाले नित्यानंद ने राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ की थी। लंबे संघर्ष के बाद सन् 2000 में भाजपा के टिकट पर हाजीपुर से विधायक चुने गए और लगातार चार बार हजीपुर क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने उजियारपुर से सांसद प्रत्याशी बनाया गया और वे भारी मतों से जीत कर संसद पहुंचे हैं।