बिहार खराब रिजल्ट: टीचरों की तय की जाएगी जिम्मेदारी, शिक्षा अधिकारी होंगे जांच के घेरे में

पटना। बिहार में खराब रिजल्ट को लेकर अब बिहार सरकार हरकत में आई है। जब वहां कि शिक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब जाकर बिहार सरकार को ये जानने की जरूरत पड़ी के आखिर बिहार का रिजल्ट खराब कैसे आया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आखिर बिहार में इंटरमीडियट का रिजल्ट खराब कैसे आया। सरकार अब इसकी जांच करेगी। सरकार इस बात पर भी गौर करेगी कि रिजल्ट सिर्फ सरकारी स्कूलों का खराब है ये गैर सरकारी स्कूलों का भी यही हाल है। 600 से ज्यादा बच्चे स्कूलों में फेल हुए हैं। इसकी भी जांच कराई जा रही है। परिक्षा के समय जिन टीचरों की भर्ती हुई थी उन की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी रोकने की कोशिश हो सकती है। लेकिन गड़बड़ी रूक जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इससे पहले कॉपी की जांच में गड़बड़ी निकली थी। इस बार सख्ती के साथ परीक्षा कराई गई तो और ही मामला सामने आया जहां उम्र छुपाकर परीक्षा दिलाई गई। इसलिए अब इसकी सीबीआई जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि परीक्षा के उस वक्त में शिक्षक हड़ताल पर चले गए जब परीक्षा कॉपियों तो मुल्याकंन होना था। तो ये हम सबका फर्ज बनता है कि हम उनको याद दिलाए कि वो वक्त हड़ताल का नहीं था। नीतीश कुमार का कहना है कि न्यायालय के कहे जाने पर सन 1996 में सख्ती की गई थी। उस वक्त 15 प्रतिशत रिजल्ट आया था। नीतीश ने कहा कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां किसी पर भी पर्दा नहीं डाला जाता। हर चीज को उजागर किया जाता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि कभी-कभी ऐसा स्थिति बन जाती है कि हमें उसे चुनौती के तौर पर लेनी पड़ती हैं। मैंने हमेशा चुनौतियों को एक अवसर के तौर पर लिया है। लेकिन परीक्षा को लेकर जो परिस्थिति सामने आई है उसका सही तरह अध्ययन किया जाएगा और उस पर आकलन कर के कार्ययोजना तैयार की जाएगी और अगर इसके लिए किसी भी तरह की आंतरिक संसाधन की जरूरत होगी तो वो भी उपलब्ध कराई जाएगी।