RJP नेता करना चाहते हैं नीतीश कुमार की सरकार को अस्थिर

पटना। राष्ट्रपति चुनाव ने हर पार्टी के अंदर खलबली मचाई हुई है अब आरजेडी और जेडीयू को ही ले लीजिए। दोनों के बीच कुछ वक्त पहले काफी दूरियां देखने को मिली और काफी खटास भी महसूस की गई। लेकिन बीत बुधवार को लालू और नीतीश के फोन पर बात करने से फिलहाल दोनों के बीच चल रहे युद्ध को विराम तो लग गया है लेकिन जेडीयू के सुत्रों का कहना है कि हाल ही के दिनों में दोनों के बीच हुई घटनाओं खास कर नीतीश को पद से हटाने की साजिश ने गठबंधन पर बुरा असर तो डाला है।

बता दें कि जेडीयू के महासचिव के सी त्यागी ने भी बीती बुधवार को सहज गठबंधन तोड़ने के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि पार्टी का मतलब गठबंधन तोड़ने का बिल्कुल नहीं है। उनका कहना है कि बीजेपी से हाथ मिलाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। हम गठबंधन को तोड़ना नहीं उसे मजबूत बनान चाहते हैं। हालांकि जेडीयू के हलकों में आरजेडी की नीयत को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं है उसकी नियत को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। जेडीयू के एक सीनियर पदाधिकारी का कहना है कि हमारे पास जानकारी है कि एक राज्यसभा एमपी समेत दो आरजेडी नेताओं ने बीजेपी के कुछ सीनियर नेताओं के साथ पर्सनल मीटिंग्स की है। उन नेताओं के साथ अनौपचारिक बात करने का भी क्या मतलब जिन्हें आप अपना दुश्मन कहते हों? और वह भी तब, जब लालू के परिवार के खिलाफ बेनामी संपत्तियों को लेकर एजेंसियां कार्रवाई करने जा रही हैं।

साथ ही जेडीयू के पदाधिकारी ने ये जानकारी एक शर्त पर दी है कि उसका नाम उजागर न किया जाए। पदाधिकारी ने शक जताते हुए कहा कि आरजेडी के एक तबका केंद्र सरकार को ‘खुश’ करने के लिए नीतीश सरकार को अस्थिर करना चाहता है ताकि बदले में लालू के परिवार के खिलाफ बेनामी संपत्ति को लेकर चल रही जांच में मदद मिल सके। पार्टी सूत्रो का कहना है कि अगर दोनों एक दूसरे के नेताओं को बयानबाजी करने से रोक भी ले तो इन दोनों के बीच की दूरियां कम नहीं होने वाली और न ही दोनों के बीच अविश्वास कम नहीं होगा। अगर आयकर विभाग ने लालू के छोटे बेटे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के किलाफ मुकदमा चलाने के फैसला लिया तो वहां से दोनों के रास्ते बिल्कुल अलग हो जाएंगे क्योंकि लालू को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगेगी।

तेजस्वी यादव पर मुकदमें की असली वजह पिछले सप्ताह आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई 170 करोड़ की संपत्ति है जो तेजस्वी यादव के नाम पर है। जिसके हिसाब से उन पर मुकदमा चलना तय है। जबकि जेडीयू ने इस पर अभी तक कोई समर्थन नहीं जताया है कि आयकर विभाग की कार्रवाई बीजेपी की साजिश है।

एक जेडीयू नेता ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करने को लेकर आरजेडी नेताओं द्वारा नीतीश पर किए जा रहे हमलों पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘हमने यह कड़ा संदेश दिया है कि नीतीश के साथ गठबंधन में भी रहना और उनकी बुराई भी करना, यह साथ-साथ नहीं चल सकता।’ पार्टी के इस सीनियर नेता ने भी नाम न बताए जाने की शर्त पर यह बात कही।

केसी त्यागी ने भी हालांकि बीजेपी से हाथ मिलाने की बात को तो खारिज कर दिया, लेकिन यह भी कहा कि जिस तरह से विपक्षी दलों ने जेडीयू द्वारा रामनाथ कोविंद को समर्थन दिए जाने पर प्रतिक्रिया दी, वह निराश करने वाली थी। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इटली जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘मंदसौर की घटना के बाद हुई विपक्षी दलों की बैठक में किसानों के मुद्दों को लेकर जिला स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किए जाने का फैसला हुआ था, लेकिन राहुल अचानक विदेश चले गए और उनकी पार्टी ने इन विरोध-प्रदर्शनों में अलग ही दिखी। सभी दलों को मिलकर यह देखना चाहिए कि किसानों के मुद्दों को सही तरीके से न उठा पाने के लिए कौन जिम्मेदार है।