सुशील मोदी का नीतिश पर वार शराबबंदी के साथ हो तो योग के साथ क्यों नहीं ?

पटना। भाजपा के कद्दावर नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने सीएम नीतीश पर एक बार फिर से हमला करा है। सुशील मोदी ने कहा की अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस पर दर्जनों मुस्लिम देशों सहित दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में करोड़ों लोग सार्वजनिक रूप से योगाभ्यास कर भारत की प्राचीन विद्या का सम्मान करेंगे हैं।

योग महर्षि पतंजलि की भूमि बिहार में स्थापित योग विद्यालय दुनिया में योग का प्रचार करता है, फिर बिहार की नीतीश सरकार योग दिवस का बहिष्कार क्यों करती रहती है। राज्य सरकार के विरोध करने के बावजूद लाखों लोग यहां भी योग दिवस मनायेंगे। अकेले में योग करने वाले नीतीश कुमार बतायें की क्या वे कट्टरपंथी ताकतों के डर से योग कार्यक्रम का विरोध करते हैं। तीन तलाक के मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं? अगर मुख्यमंत्री शराबबंदी को सफल बनाना चाहते हैं, तो उन्हें योग का प्रचार भी करना ही होगा। यह बहुत बड़ी बात है की योग करने वाला व्यक्ति शराब नहीं पीता।

जब नीतीश कुमार शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला बनवा सकते हैं, तब वे योग दिवस पर सरकारी आयोजन क्यों नहीं कराते ?
मुख्यमंत्री के मन में यदि योग के प्रति थोड़ा भी आदर है, तो उन्हें गांधी मैदान में योग दिवस का नेतृत्व करना चाहिए और योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की घोषणा कर हर विद्यालय में योग शिक्षकों की नियुक्ति करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरूआत की थी। यह भाजपा या किसी हिंदू संगठन का कार्यक्रम नहीं है। इससे नीतीश सरकार की बेरुखी दुर्भाग्यपूर्ण है। शराबबंदी से तो अपराध में कमी नहीं आयी, लेकिन अगर योग को बढ़ावा दिया गया, तो समाज में शांति अवश्य बढ़ेगी। सुशील मोदी द्वारा किए गए हमले का नीतिश ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है।