एनजीटी का बेंगलुरु में ऑटो उद्योग को राहत देने से इंकार

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने बेंगलुरु के बेलांदुर झील के आसपास के ऑटो उद्योगों को राहत देने से इन्कार कर दिया है। इन उद्योगों ने एनजीटी से मांग की थी कि उन्हें बंद करने के आदेश से राहत दी जाए।

बतादें कि एनजीटी ने पिछले 24 मई को बेलांदुर झील के आसपास के 76 उद्योगों को बंद करने का आदेश दिया था। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने बेंगालुरु के उपायुक्त को आदेश दिया था कि इन उद्योगों की पानी और बिजली के कनेक्शन तत्काल प्रभाव के काट दिए जाएं।

एनजीटी ने आसपास के हाउसिंग सोसायटियों और रिहायशी कांपलेक्स को भी निर्देश दिया था कि उनके सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तय मानदंड के मुताबिक काम न पाए जाने पर बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिए जाएं। इनके सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की जांच बेंगालुरु वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संयुक्त रुप से कराने काम निर्देश दिया था। जहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं काम कर रहे हैं वहां एक तय समय के भीतर अपने प्लांट को मानदंडों के मुताबिक ठीक कर लेना होगा नहीं तो उनकी भी बिजली और पानी काट दी जाएगी।

आपको बता दें कि पिछले 19 अप्रैल को एनजीटी ने झील के आसपास कचरा डंप करने वालों पर पांच लाख रुपये का मुआवजा वसूलने का भी आदेश दिया था। एनजीटी ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि झील को सभी प्रदूषण फैलाने वालों से मुक्त करें।

एनजीटी ने कर्नाटक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया था कि अगर कोई उद्योग आदेशों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसे सील कर दिया जाए। किसी भी उद्योग को चलाने की अनुमति तभी दी जा सकती है जब उसका निरीक्षण कर ये पाया जाता है कि उससे निकलने वाला कचरा तय सीमा में है। एनजीटी ने कहा था कि किसी भी प्रकार का कचरा चाहे वो नगरपालिका का ठोस अपशिष्ट हो या घरेलू कचरा उसे झील के आस पास नहीं डालने दिया जा सकता है।

एनजीटी ने कर्नाटक राज्य सरकार, कर्नाटक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लेक डेवलपमेंट अथॉरिटी और बेंगालुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी को झील को तुरन्त साफ करने का आदेश दिया था और एक महीने में उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।