महिला होने की वजह से मेरी मां भारत में नहीं बन सकी जज: निक्ली हेली

वॉशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की एम्बेसडर निक्ली हेली का एक बड़ा बयान सामने आया है जो कि इस समय काफी सुर्खियां बटोर रहा है। हेली ने फॉरेन रिलेशन काउंसिल की एक मीटिंग के दौरान कहा कि उनकी मां को महिला होने की वजह से भारत में जज नहीं बनने दिया गया हालांकि उनकी मां पूरी तरह से इस पद के काबिल थी क्योंकि वो एक महिला थी इसलिए उनके साथ ऐसा किया गया।

इसके साथ ही अमेरिका की एंबेसडर चुने जाने पर उन्होंने कहा कि मेरी मां मेरे लिए बहुत खुश है अगर मेरी मां जज बनती तो वो भारत की पहली महिला जजों में से एक होती।

निक्की के माता-पिता अजीत सिंह और राज कौर रंधावा साल 1960 में भारत को छोड़ अमेरिका में जाकर बस गए थे लेकिन उनके शिफ्ट होने के पहली ही अन्ना चांडी त्रावणकोर में आजाद भारत की पहली जज बन गई थी। साल 1948 में जिला जज बनीं तो वहीं 1959 में हाईकोर्ट की जज बनी। वहीं अगर निक्की की बात करें तो उन्होंने अमेरिका में ट्रेड और मजदूरों के लिए काफी काम किया है और वो अमेरिकी की गवर्नर भी रह चुकी हैं। हालांकि निक्की ने पहले ट्रंप का विरोध किया था लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद ही एंबेसडर की जिम्मेदारी सौंपी।