धर्म की दीवार तोड़कर हिंदू लड़की की शादी के लिए मुस्लिम ने की मदद

हरदोई। धर्म का काम तोडना नहीं बल्कि सभी को जोड़ने का है ये बात वर्तमान समय में चल रहे माहौल में बेमानी सी लगती है। परन्तु हमारे देश भारत में अभी भी कई ऐसे लोग है जो जात समुदाय में विश्वास ना करते हुए सिर्फ इंसानियत की बात पर ही यकीन करते है और अपनी पहल से धर्म के उन कथित ठेकेदारो को ठेंगा भी दिखाते है, जो धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करते है। ऐसी ही एक अच्छी पहल का मामला हरदोई में सामने आया है। जहां एक बेहद गरीब परिवार के गांव की हिन्दू लड़की के विवाह को अच्छे ढंग से सम्पन्न कराने में मुस्लिम युवक ने भूमिका निभाई।

दुल्हन के भेष से श्रंगार से सजी बैठी इस दुल्हन का नाम शिवकली है। हरियावां थाने के मरई गांव की रहने वाली इस लड़की के पिता की मौत कुछ समय पहले हो चुकी है। घर में केवल माँ और एक छोटा भाई और पूँजी के नाम पर तीन बीघा जमीन ऐसे में शिवकली की शादी तय हो गयी तो बरात के स्वागत सत्कार के लिए और सामान्य दहेज़ के लिए शिवकली की माँ अपने खेत का दो बीघा जमीन बेच रही थी।

लड़की की शादी के लिए छोटी सी जमीन के टुकड़े में से एक हिस्सा बेचने की जानकारी उसके एक सामाजिक संस्था से जुड़े दूर के रिश्तेदार को हुई जो इस संस्था के ब्लॉक अध्यक्ष है तो उन्होंने अपनी संस्था के मुस्लिम पदाधिकारी फ़िरोज़ अहमद को संघ के राष्ट्रीय महासचिव है उनको बताया तो फ़िरोज़ ने आगे बढ़कर उन लोगो की मदद करने का फैसला किया जिसके बाद सब लोगो ने मिलकर इस शादी का पूरा खर्चा उठाने का फैसला किया। उसके बाद गांव में होने वाली शादी को संस्था के पदाधिकारी के घर से हुई। फर्रुखाबाद से बरात आयी और पूरे विधि विधान से शादी की सारी रस्मे पूरी की गई।

बेटी के हाथ पीले करने के लिए खेत बेचने में लगी माँ फिलहाल मुस्लिम युवक और अपने दूर के राश्तेदार की दरियादिली से काफी प्रसन्न है की जहा उसके अपने काम नहीं आये ऐसे में उन लोगो ने उसकी मदद की जिनसे उसको उम्मीद नहीं थी। एक गरीब लड़की की शादी में पूरा सहयोग करने के बाद संस्था के पदाधिकारी भी खुश है की उन्होंने समय रहते एक मजबूर माँ का लड़की के हाथ पीले करने के लिए खेत बिक्री से बचाया और साथ ही मदद करके समाज के मिसाल भी कायम की।

 आशीष सिंह, संवाददाता