पेशी के लिए आए कुख्यात बबलू दुबे की हत्या, पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल

पटना। पेशी के लिए लाए बेतिया कोर्ट आए बबलू दूबे की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। बबलू दूबे की हत्या की जानकारी मिलते ही मोतिहारी जेल में दो गिरोह के आपस में मिलने की जानकारी है, लेकिन पुलिस इससे इंकार कर रही है। चंपारण के आतंक के रूप में जाना जाने वाले बबलू पर 50 से ज्यादा अपहरण, हत्या और लूट के मामले दर्ज थे। जेल में रहते हुए बबलू ने नेपाल के बड़े व्यवसायी सुरेश केडिया का अपहरण कर लिया था।

पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे सवाल

बता दें कि बेतिया कोर्ट में बबलू दूबे की हत्या से पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्पेशल सुरक्षा में कोर्ट में पेशी के लिए आए बबलू पर जब हमला हुआ पुलिस उनसे दूर खड़ी थी। जबकि पुलिस को अपने घेरे में बबलू को लेकर पेशी के लिए जाने के निर्देश दिए गए थे। हमलावर बबलू पर हमला कर फरार हो गए, लेकिन पुलिस की ओर से एक गोली भी हमलावरों पर नहीं चलायी गयी। एसपी बेतिया ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि भगदड़ नहीं मच जाए इस कारण पुलिस ने गोली नहीं चलायी।

पुलिस की मिली भगत पर भड़के एसपी

हत्या में पुलिस की मिली भगत पर एसपी बेतिया विनय कुमार भड़क गए। एसपी ने कहा ऐसा नहीं है। आरोप तो मेरे ऊपर भी लग सकते हैं। मैंने ही उसे 2013 में गिरफ्तार किया था। बहरहाल पुलिस इसपर अपनी जो सफाई दे, स्थानीय लोग इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

जवाहर साह के मामले की पेशी पर कोर्ट आया था बब्लू
बबलू को मझौलिया के अहवर शेख के मुखिया जवाहर साह की हत्या के मामले में आज कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। पुलिस को अशंका है कि जवाहर साह के समर्थकों की ओर से ही उस पर हमला किया गया होगा। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही सच सामने आयेगा।

जेल में आपस में भिड़े थे दो गुट

बबलू दूबे की हत्या की सूचना मिलने के बाद मोतिहारी जेल में दो गुट में मारपीट की जानकारी मिली है। लेकिन पुलिस का कहना है कि जेल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। बबलू दूबे मोतिहारी का रहने वाला था। इस कारण उसके समर्थक किसी प्रकार का उत्पात नहीं मचाये, इसलिए सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है।

2013 में किया गया था गिरफ्तार

बेतिया एसपी विनय कुमार ने मोतिहारी एसपी रहते हुए बबलू दूबे को नेपाल से गिरफ्तार किया था। बबलू पर हत्या अपहरण और रंगदारी के करीब 50 से ज्यादा मामला दर्ज हैं। पुलिस बबलू दूबे को चंपारण का आतंक मानती थी। गिरफ्तारी के बाद बबलू जेल में रहते हुए कई अपहरण को निरंतर अंजाम दे रही था। इससे चंपारण में अपराध का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा था।