कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश देने पर मुलायम सिंह हो शर्मसार बोले कांड के पीड़ित

नई दिल्ली। बीते 22 नवम्बर को समाजवादी पार्टी के संरक्षक और संस्थापक नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन था। अब नेता जी का जन्म दिन इस बार सत्ता के रंग से दूर सादगी से मनाया जा रहा था। लेकिन इस मौके पर मुलायम सिंह ने पहले तो कार्यकर्ताओं को नसीहत दी। लेकिन इस नसीहत में नेताजी ने अयोध्या में कारसेवकों पर सन 1990 में गोली कांड को उदाहरण के तौर पर बताते हुए कहा कि इस बार विधान सभा चुनाव में 47 सीटों का आना शर्मनाक है। क्योंकि इनती कम सीटें तो तब नहीं आई जब 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। इसके साथ ही उन्होने कहा कि देश की एकता के लिए और भी कारसेवक मारने पड़ते तो सुरक्षा बल उन्हें मार देते। मुलायम ने इसके पहले भी 30 अक्टूबर और 2 नवम्बर को हुए रामनगरी अयोध्या में भीषण गोलीकांड को लेकर एक बयान दिया था। जिसमें उन्होने कहा था कि इस कांड का उन्हें कोई अफसोस नहीं है।

मुलायम सिंह के इस बड़बोले पन के बाद अब उस कांड से जुड़े लोगों ने इसको लेकर काफी गुस्सा और प्रतिक्रिया है। भारत खबर की टीम ने इस मामले को लेकर इससे जुड़े लोगों से बातचीत की । जिसमें उन्होने साफ तौर पर मुलायम सिंह यादव को इस प्रकरण पर माफी मांगने  को कहा है और सांप्रदायिकता के नाम पर वोट की राजनीति करने वाला बताया है।

मुलायम सिंह ने मुस्लिम वोटों की राजनीति के लिए चलाई गोली

इस प्रकरण से जुड़ी कोलकता की पूर्णिमा कोठारी ने मुलायम सिंह को लेकर साफ तौर पर कहा कि जिस पर बीती है , दर्द का पता उसे ही होगा। चंद वोटों की राजनीति के लिए मासूम लोगों पर गोली चलाना या उसका आदेश देना किसी स्वतंत्र देश में जायज नहीं है। ऐसे में सड़क पर बैठे कारसेवकों पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश की सरकार के आदेश पर गोली चलाई गई।

पूर्णिमा कोठारी ने इस गोली कांड में अपने दो भाई राम कोठारी और शरद कोठारी को खो दिया था। वो साफ तौर पर मुलायम सिंह सरकार को इस कांड के लिए जिम्मेदार मानती हैं। उनका मानना है कि इस जघन्य कांड के लिए मुलायम सिंह पर न्यायपालिका सजा दे क्योंकि बिना कारण के गोली चलाने का ये आदेश एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए मुलायम सिंह ने दिया था। इस आदेश में सांप्रदायिता की बू आती है।

डायर भी आज होता तो शर्मा जाता

इस कांड को लेकर युवा वर्ग में भी काफी रोष है, 2 नवम्बर 1990 में राम नगरी अयोध्या में हुए तांडव की मुख्य गवाह इला मिश्रा उस कांड को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। इला कहती हैं कि हमारा मंदिर राम जन्म भूमि मुख्य मार्ग पर है। जहां पर हम लोगो अपने परिवार और मंदिर के लोगों के साथ रहते थे। लगातार अयोध्या उन दिनों अघोषित कर्फ्यू में जी रहा था। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में परिंदा पर ना मार माने की घोषणा की थी। सदियों से रामनगरी में कार्तिक माह में होने वाले कल्पवास और परिक्रमा को रोक दिया था।

इसके बावजूद कारसेवक रामलला का दर्शन करने आ गए तो हमारे मंदिर के सामने की सड़क पर बैठे कीर्तन भजन कर रहे थे। तभी उन पर बिना किसी चेतावनी के पुलिस ने लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले दागे इसके बाद उन पर गोलियां चला दी। वहां पर हमारा मंदिर एक मात्र खुला था। जिसमें कारसेवकों में घुसकर अपनी जान बचानी चाही तो पुलिस ने छतों से आकर कर दरवाजे तोड़कर कारसेवकों को चुन-चुन कर गोलियां मारी। ऐसा जघन्य कांड अगर जलियांबाग कांड का सूत्रधार जनरल डायर भी देखता में शर्मा जाता । मंदिर के सामने और मंदिर के अन्दर की जमीन लाल हो गई थी।

मुलायम को शर्मसार होना चाहिए इस कृत्य पर

इस कांड से जुड़ी विहिप की फायरब्रॉड धर्माचार्य डॉ ओम श्री भारती साफ तौर पर इसके लिए तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार को दोषी मानती हैं। उनका मानना है कि पहले भी लोग अयोध्या आते थे। रामजन्मभूमि का विवाद तो अंग्रेजों के पहले से चल रहाथा। लेकिन देश की आजादी के बाद 1949 में इस विवाद का पुन:उद्भव हुआ लेकिन अयोध्या शांत थी। लोग कार्तिक माह में कल्पवास करने आते थे तो भीड़ अयोध्या में भर जाती थी। लोग प्रमुख स्थलों का दर्शन करते थे। लेकिन 1990 में रामनगरी को संगीनों में कर दिया गया। हमारे मंदिर में घुसकर पुलिस ने गोलियां चलाई। कारसेवकों को मार और ऐसे कारसेवकों को मारा गया जो सड़क पर बैठकर रामधुन गा रहे थे।

सभी कारसेवक निहत्थे थे ऐसे में पुलिस ने अंधाधुंध गोलियों से कारसेवकों का सीना छलनी कर दिया गया। मंदिर से खींच कर कारसेवकों को मार गया। आखिर स्वतंत्र भारत में ये कैसा राज था। केवल मुस्लिम वोटों को तुष्टिकरण के लिए मुलायम सिंह ने गोली चलाई और आज उन्हे इस बात का जरा सा भी दुख नहीं है बल्कि वो बयान देते हैं कि देश की एकता के लिए और भी कारसेवक मारने पड़ते तो सुरक्षा बल उन्हें मार देते। ये बयान किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि एक वर्ग विशेष के वोटों के लिए राजनीति करने वाले का हो सकता है। मुलायम सिंह को अपने इस कृत्य पर शर्मिंदा होना चाहिए। ओम श्री भारती ने ही इस कांड की प्रमुख चश्मदीद गवाह है, 1990 में इसके मंदिर पर ये गोली कांड हुआ था। उस दौरान जब सारे संघ और विहिप के साथ भाजपा के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब डॉ ओम श्री भारती ने ही इस कांड के बाद लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने काम जिम्मा उठाया था।

अजस्र पीयूष