राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित हुई मेरठ की शिक्षका रजनी रानी

मेरठ। शिक्षा के व्यवसायिकीकरण के दौर में सरकारी शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। वहीं इस समाज में ऐसे भी शिक्षक है, जिन्होंने शिक्षा को पूजा मानकर ऐसे मील के पत्थर गाड़े हैं जिन्हें छूना भी मुश्किल है। मेरठ की ऐसी ही एक शिक्षिका को देश के राष्ट्रपति आज शिक्षक पुरस्कार से नवाजेंगे।

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मेरठ सिटी के रघुनाथ गर्ल्स कॉलेज की बुनियाद 1929 में रखी गयी थी। लेकिन यूपी के चंद प्रतिष्ठित कॉलेजों में इसकी गिनती होती है। कॉलेज के प्रतिष्ठा और शिक्षा गुणवत्ता को संवारने का काम इस कॉलेज की प्रिसिंपल रजनी रानी बीते 6 साल से कर रही है। 2011 में इस कॉलेज की पढ़ाई-लिखाई में एक क्रांतिकारी परिवर्तन करते हुए प्रिसिंपल रजनी रानी ने कक्षाओं को अंग्रजी माध्यम करना शुरू किया। कक्षा 6 से शुरू करके आज आर्ट, साइंस और कामर्स की सभी कक्षाए मैंहगे कान्वेंट स्कूलों की तरह इस कॉलेज में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम से संचालित होती है।

वहीं छात्रा पारुल का कहना है कि अमूमन सरकारी मदद से चलने वाले प्रबंधन स्कूलों में ऐसे परिवर्तन नही होते है। बेटियों का नारा बुलंद करते हुए अपने कॉलेज में पढ़ रही 3 हजार से ज्यादा छात्राओं को कान्वेंट स्कूल के मुकाबिल बनाया है। वो अलग बात है कि यूपी के बाकी स्कूलों की तरह यह स्कूल भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। लेकिन रजनी रानी ने इसे अपनी कमी नही ये ताकत बनाया है। एक आंकड़े के मुताबिक यूपी के बेसिक शिक्षा, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल-कॉलेजों में करीब एक लाख शिक्षकों की जरूरत है।

तो शिक्षिका पूनम ने कहां कि एफवीओ- मेरठ के प्राइमरी स्कूल में शिक्षक औंकारसिंह को भी आज राष्ट्रपति से शिक्षक पुरस्कार मिलेगा। आज के दौर में ये शिक्षक गुरू-शिष्य परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए नजीर बने हैं। साथ ही उदाहरण है कि सरकार के सीमित संसाधनों में आगे बढ़ने के लिए केवल साहस की जरूरत होती है, साधन की नही।