मंत्री मदन कौशिक और मंत्री सतपाल महाराज के बीच वर्चश्व की जंग में मेयर मनोज गर्ग बने मोहरा

नई दिल्ली। सूबे की धर्मनगरी हरिद्वार में वर्चश्व की एक जंग ऐसी देखने को मिली । जहां पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सिद्ध करने के लिए सत्ताधारी पार्टी भाजपा के एक मंत्री की साजिश का शिकार जिले के मेयर को होना पड़ा। जीं हां हम बात कर रहे हैं, 2 दिन पहले धर्मनगरी के पाश इलाके में हुए एक घमासान की जिसमें मेयर मनोज गर्ग घायल हो गये। ये घमासान सूबे के दो मंत्रियों के समर्थकों के बीच हुआ और मेयर को इसका खामियाजा उठाना पड़ा । सूबे के मंत्री मदन कौशिक और मंत्री सतपाल महाराज में राजनीतिक वर्चश्व की बात जग जाहिर है। मंत्री मदन कौशिक को महाराज का बढ़ता राजनीतिक कद कभी रास नहीं आता रहा है। इस बार उन्होने मेयर और नगर निगम के सहारे अपना तीर साधा था। लेकिन अब तीर उल्टा ही पड़ गया है।

जिस आश्रम की दीवार को अतिक्रमण के नाम पर मेयर का सहारा लेकर तोड़ने के बाद खूनी संग्राम छिड़ा । अब आश्रम प्रशासन इस मामले को लेकर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। हांलाकि खुद मंत्री मदन कौशिक आश्रम आये थे। लेकिन आश्रम प्रबंधन ने उनको दो टूक जवाब दे दिया है। क्योंकि दो दिन पहले धर्म नगरी में एक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था। ये ड्रामा सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और इसी सरकार के मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों के बीच मारपीट का था।

10 तारीख को हरिद्वार के मेयर मनोज गर्ग अतिक्रमण हटाओ अभियान पर निकले थे। उनका ये अभियान देखते देखते हरिद्वार की पाश कॉलोनी खन्ना नगर में सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम तक आ पहुंचा। मेयर साहब के साथ सरकारी दल के अलावा कुछ ऐसे लोग भी थे जिनकी पहचान सूबे में मौजूद भाजपा सरकार के मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों के तौर पर है। मेयर साहब मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम की दीवार गिराने के लिए आदेश दे रहे थे। तो आश्रम के लोगों ने इसे रोकते हुए मेयर से कारण पूछा तो उन्होने कहा कि ये दीवाल अतिक्रमण करके बनाई गई है। नाले पर अतिक्रमण के कारण जलभराव हो रहा है। अभी दोनों पक्षों में बातचीत का ही दौर चल रहा था कि मेयर के साथ मौजूद मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों ने मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम के लोगों से बत्तमीजी करने लगे। बातचीत से मामला गाली-गलौज पर आ गया।

इसके बाद हालात ऐसे बिगड़े कि फिर देखते-देखते आश्रम के बाहर युद्ध का मैदान बन गया। दोनों पक्षकार आपस में जवाबी कीर्तन में लग गए। फिर क्या डंडा क्या लाठी और क्या पत्थर सबने मिलकर ऐसा रंग जमाया की मेयर से लेकर कई लोगों को अपनी जान बचाकर अस्पताल की शरण लेनी पड़ी। स्थानीय लोगों और सूत्रों की माने तो मदन कौशिक और सतपाल महाराज में राजनीतिक प्रतिद्वन्दिता रहती है। जिसके चलते इस पूरे प्रकरण में जब घमासन शुरू हुआ तो  सरकार में मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों ने भी बहती गंगा में हाथ धोए।

इस पूरी घटना को राजनीतिक वर्चश्व के चलते छोटी सी चिंगारी को आग का रूप प्रदान कर दिया । जिसके बाद ये छोटी सी तनातनी भीषण खूनी संग्राम में बदल गई। इलाके की सड़कें रण भूमि नजर आने लगी। कभी पत्थरों की बौछार तो कभी डंडों की मार इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को इस पूरे रंगारंग कार्यक्रम की सूचना दी। इसके मौके पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में जमकर लाठियां फटकारनी शुरू कर दी। पुलिस की लाठियों के बीच ये अराजक तत्व गायब हो गये और आम लोगों पर भी पुलिसिया कहर वज्र बनकर टूटा। हांलाकि इस पूरे रंगारंग कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मेयर समेत कई लोग बुरी तरह से घायल हो गये थे।

मेयर की आड़ में अपना राजनीतिक वर्चश्व बनाने के लिए इस दंगल में जोर अजमाने उतरे मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों और मंत्री सतपाल महाराज के समर्थकों के बीच ये खूनी दंगल पुलिस के आने तक पूरे सबाब पर चलता रहा। पुलिसिया कार्रवाई के बाद ये तूफान तो शांत हो गया। लेकिन मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों ने सतपाल महाराज के समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए वहीं प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद प्रशासन टीम लगाकर दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांत कराया। लेकिन इस पूरे प्रकरण के बाद एक बार एक बात खुलकर सामने आ गई कि मदन कौशिक की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की भेंट आखिरकार मेयर चढ़ गये।