यूपी विस चुनावः मायावती प्रचार के लिए लेंगी सोशल मीडिया का सहारा

लखनऊ।  विधानसभा चुनाव की डुगडुगी बज चुकी है। राजनीतिक दलों ने अपने प्रचार और रणनीति बनाना शुरु कर दिया है। बसपा 401 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। अब पार्टी का फोकस केवल चुनाव प्रचार पर है। इसके साथ वह प्रचार अभियान में भी तेजी लग चुकी है। सोशल मीडिया से दूर रहने वाली बसपा इस बार अपने प्रचार के लिए तकनीक विशेषज्ञों की सेवाएं भी ले रही है।

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ट्विटर के जरिए हो रहा प्रचार

बसपा को लगता है कि भाजपा और सपा ने सोशल मीडिया के माध्यम से वोटरों तक अपनी बात आसानी से पहुंचा ली है। तो इस बार वह भी इस माध्यम से तेजी से प्रचार कर रही है। बसपा ने अभियान के लिए पोस्टर्स की पहली खेप भी जारी कर दी है। पोस्टर में सबको सुरक्षा का वायदा करने के साथ ‘बहन जी को आने दो’ स्लोगन दिया गया है। हर बार त्वारित टिप्पणी के माध्यम से मायावती विरोधी पार्टियों के लिए संकट पैदा कर रही हैं। बसपा मुखिया इस बार किसी भी कीमत में सत्ता पाना चाहती है, इसलिए उन्होंने हर तरह की सोशल इंजीनियरिंग की है। प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार में भी वही रणनीति अपनाई जा रही है।

पार्टी ने जारी पोस्टर में प्रोफेशनल्स की भरपूर मदद ली गई। नारों का चयन भी जनाकांक्षाओं के साथ सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर किया गया है। सभी वर्गों को निश्चिंत रहने का आश्वासन देते ये पोस्टर बस बहनजी की सरकार बन जाने के बाद सब कुछ ठीक हो जाने का वादा करते नजर आ रहे हैं।

महिलाओं के लिए स्पेशल स्लोगन

महिला सुरक्षा को समर्पित पोस्टर में बेटियों को मुस्कुराने दो, बहनजी को आने दो नारा लिखा है, वहीं गांवों से जुड़ाव स्थापित करने को गांव खुशहाल बनाने को, बहनजी को आने दो नारा दिया गया है। एक पोस्टर सर्वजन को सम्मान दिलाने को, बहनजी को आने दो नारे के साथ समाज के सभी वर्गों को सम्मान का वादा कर रहा है, तो धार्मिक अल्पसंख्यकों की चिंता दर्शाते हुए नई रोशनी दिखाने को, बहनजी को आने दो नारा दिया गया है।

रैलियों की हो रही तैयारी

बसपा मुखिया प्रोफेशनल के साथ व्यक्तिगत टच भी रखना चाहती है। इसलिए उन्होंने बड़े स्तर पर रैली भी करने की योजना बनाई है। इनकी शुरुआत पहले चरण में होने वाले विधानसभा के जिलों से होगी। बीएसपी सुप्रीमो हर जिले में आने वाली विधान सभाओं के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करेंगी। गौरतलब है कि माया इससे पहले प्रदेश में चार मंडलीय रैलियां आगरा, इलाहाबाद, आजमगढ़ और सहारनपुर में कर चुकी हैं।