मधुर भंडारकर की ‘इंदु सरकार’ भी अटकी सेंसर में

मुंबई। ये लगभग तय माना जा रहा था कि निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर की 21 जुलाई को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘इंदु सरकार’ को सेंसर बोर्ड से क्लीयर होने में कोई परेशानी नहीं होगी। खबर मिल रही है कि सेंसर बोर्ड के अधिकारियों ने सोमवार को फिल्म का शो देखने के बाद 14 कट्स का आदेश दिया है। जिससे मधुर नाराज बताए जा रहे हैं और एपीलेट ट्रिब्यूनल में सेंसर के आदेश को चुनौती देने के संकेत दे रहे हैं।

सेंसर बोर्ड ने फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और 1977 में जनता पार्टी की सरकार के प्रधानमंत्री रहे स्व. मोरारजी देसाई के नाम को भी इस्तेमाल करने की परमीशन नहीं दी। इतना ही नहीं, ये भी बताया जाता है कि फिल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नाम के इस्तेमाल की भी इजाजत नहीं मिली है। आपातकाल के बाद कांग्रेस की रैलियों में गाने से इंकार करने के बाद बैन हुए गायक किशोर कुमार के नाम को भी इस्तेमाल करने की परमीशन सेंसर से नहीं मिली।

फिल्म के प्रोमो में एक डायलॉग है
‘अब इस देश में गांधी के मायने बदल गए हैं।’ सेंसर की ओर से इस डायलॉग पर भी आपत्ति जताई गई है। दिलचस्प ये है कि फिल्म के ट्रेलर में इस संवाद पर सेंसर की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई थी। मधुर भंडारकर को सेंसर बोर्ड की ओर से इस बात का भी आदेश दिया गया है कि फिल्म के शुरू में दो डिस्केलमर लगाए जाएं, जिनमें कहानी और पात्रों के काल्पनिक होने की बात हो। मधुर भंडारकर की ओर से सेंसर बोर्ड की ओर से मिले आदेशों पर निराशा और हैरानी जताई गई है और इसे अभिव्यक्ति की आजादी के विपरीत बताया गया है। मधुर का कहना है कि वे इन आदेशों के खिलाफ एपीलेट ट्रिब्यूनल जाने के बारे में विचार कर रहे हैं।

जब मधुर की फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था, तो सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने इसकी तारीफ की थी। सेंसर बोर्ड की ओर से इस फिल्म को इस कानून से भी छूट दी गई थी, जिसमें किसी व्यक्ति और संस्था के जिक्र होने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था से नो ऑब्जेक्शन सार्टिफिकेट लेना अनिवार्य था।

हाल ही में जब मुंबई कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने सेंसर बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखकर फिल्म को सेंसर किए जाने से पहले कांग्रेसी नेताओं को दिखाने की मांग की गई थी, तो सेंसर ने इस मांग को खारिज कर दिया था। मधुर भंडारकर ने भी कांग्रेस पार्टी की इस मांग को ठुकरा दिया था। सेंसर बोर्ड के कड़े रवैये से हैरान मधुर भंडारकर को समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी फिल्म को लेकर ये रवैया क्यों अपनाया गया।