भ्रष्टाचार की शियकतों के बाद हटाए गए शिया वक्फ बोर्ड के सदस्यों को किया गया बहाल

लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शिया वक्फ बोर्ड के हटाये गये सभी छह सदस्यों को बहाल कर दिया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के आदेश को पलटते हुए यह निर्णय सुनाया है। इन सभी को भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद हटाया गया था, जिसके खिलाफ यह लोग हाईकोर्ट पहुंचे थे। वहीं अब इन सदस्यों की बहाली के आदेश का वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने स्वागत किया है।

इससे पहले अदालत ने शिया वक्फ बोर्ड से नामित सदस्यों को हटाने पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। कोर्ट ने सरकार को शुक्रवार तक अपना पक्ष रखने को कहा था। इसके साथ ही सदस्यों को हटाने सम्बन्धी मूल रिपोर्ट भी तलब की गई थी।

जस्टिस राजन राय व जस्टिस एन.एन. अग्निहोत्री की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश आलिमा जैदी व अन्य सदस्यों की ओर से सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया था। दरअसल प्रदेश सरकार ने बीती 16 जून को बोर्ड के नामित सदस्य अख्तर हसन रिजवी, वली हैदर, आसफा जैदी, अजीम हुसैन जैदी, आलिमा जैदी और नजमुल हसन रिजवी को वक्फ संपत्ति में धांधली और अनियमितताओं की शिकायत पर हटा दिया था।

इन सदस्यों को पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में नामित किया गया था। अदालत में याचियों की ओर से कहा गया कि चेयरमैन व सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया वक्फ अधिनियम-1995 की धारा 20 व 20-ए के तहत तय है, लेकिन सरकार ने नामित सदस्यों को हटाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
याचियों के वकील ने सदस्यों का कार्यकाल पूरा हुए बिना ही उन्हें हटाए जाने को असंवैधानिक ठहराते हुए कहा कि मुख्य सचिव के 20 मार्च के एक आदेश के आधार पर नामित सदस्यों को हटा दिया गया, जबकि इन सदस्यों का कार्यकाल निश्चित समय के लिए था। वहीं प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता रमेश कुमार सिंह ने याचिका का विरोध किया। हालांकि सुनवाई के बाद अदालत ने हटाये गए सदस्यों के पक्ष में अपना फैसला दिया। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया करते है।