बागेश्वर में मिलेंगे भगवान शिव तो साथ ही दिखेगी आजादी की लड़ाई

उत्तराखंड। राज्य में सरयू और गोमती नदियों के संगम पर स्थित एक तीर्थ है जिसे बागेश्वर कहते हैं। भगवान शिव के बाघ रूप धारण करने वाले इस स्थान को व्याघ्रेश्वर तथा बागीश्वर से कालान्तर में बागेश्वर के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस नगर को शिव के गण चंडीश ने शिवजी की इच्छा के अनुसार बसाया था।

 

बागेश्‍वर में धार्मिक पर्यटन के लिए तो देश-विदेश से लोग आते ही हैं, इसके साथ ही यहां एडवेंचर टूरिज्‍म के शौकीन भी डेरा डाले रहते हैं।इनके अलावा भी बागेश्‍वर में कई ऐसी सैर-सपाटे की जगहें हैं जिनकी तरफ पर्यटक चले आते हैं।

बागेश्वर में बागनाथ मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। एक प्राचीन मंदिर शिव जी को समर्पित है यह सरयू और गोमती नदीयो के संगम पर वागेश्वर जिले में स्थित है बागेश्वर जिले का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है इसी कारण वागेश्वर जिले का नाम इसी मंदिर के नाम पर पड़ा है।

मकर संक्रांति के मौके पर यहां स्नान का विशेष महत्त्व है. दूर-दूर से इस मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां सरयू और गोमती के संगम में स्नान के बाद भगवान बागनाथ के मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

बागेश्वर में सिर्फ मंदिर बल्कि हमारी अंग्रेजों से लड़ाई के किस्से को भी पहचान यहां देखने को मिलती है।अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को हिलाने वाली यह एक ऐसी क्रांति थी जिसको राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने न केवल रक्तहीन क्रांति का नाम दिया बल्कि आंदोलन से प्रभावित होकर 1921 में बागेश्वर पहुंचकर स्वराज भवन की नींव रखी।यहां की बहुत सी चीजों से बापू की यादें जुड़ी हुई है।