भगवान जगन्नाथ का नेत्रोत्सव संपन्न

नई दिल्ली। स्थानीय जगन्नाथ मंदिर में नेत्रोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर 360 घरिया आरण्यक ब्राम्हण समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे साथ ही अन्य श्रद्धालुगण ने भी भगवान जगन्नाथ बलभद्र व देवी सुभद्रा के नेत्रोत्सव में भाग लिया।

इस अवसर पर विधिवत भगवान काष्ठ प्रतिमा को दुग्ध से अभिषेक करने के पश्चात भगवान के नेत्रों में अंजन लगया गया विगत पखवाड़े पौणाणिक कथाओं के आधार पर भगवान जगन्नाथ बलभद्र एवं देवी सुभद्रा देवी के मुक्ति मंडप में स्वास्थ लाभ के लिए स्थापित किया गया था, जहां से उन्हें विविवत नेत्रोत्सव के पश्चात उन्हें अपने स्थान पर पुन: स्थापित किया गया है। रविवार को श्रीगोंचा के अवसर पर तीनों प्रतिमाओं को रथारूढ़ कर नगर की प्ररिक्रमा की जाएगी।

इस अवसर पर आयोजन को सफल बनाने हेतु आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष द्वारा समाज के सभी लोगों का योगदान जुटाया जा रहा है और गोंचा पर्व उल्लाहासपूर्ण वातावरण में मनाये जाने की अपेक्षित तैयारी कर ली गई है। इस अवसर पर भगवान की प्रतिमाओं को आभूषणों से सुसज्जित करने हेतु जिला कोषालय में सुरक्षित रूप से रखाये गए आभूषण भी समाज द्वारा इस आयोजन के लिए प्राप्त कर लिए गये हैं। इस वर्ष गोंचा पर्व के आयोजन को लेकर लोगों में विशेष रूप से उत्साह देखा जा रहा है।

जगन्नाथ मंदीर के आश्चर्यजनक तथ्य
पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको हमेशा ही आपके सामने लगा है ऐसा दिखेगा।

सामान्य दिन में हवा हमेशा समुद्र से जमीन के तरफ जाती है लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है।
मंदीर के उपर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत में लहराता है।
गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है।
मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक पर एक करके रख दिए जाते है। सबसे पहले सबसे उपर वाले बर्तन की प्रसाद पकता है फिर उसके निचे के बारी-बारी से पकते रहते है।
एक पुजारी मंदीर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है क्यूकि ऐसी मान्यता है कि अगर एक भी दिन झंडा नही बदला गया तो मंदिर 18 वर्षो