करें अपरा एकादशी का व्रत, मिलेंगे हजारों पुण्य..

धर्म डेस्क। अपरा एकादशी एक मात्र ऐसा व्रत हें जिसे करने से हजारो पुण्य का फल प्राप्त होगा। आपको हम इसके पीछे की कहानी भी बताएंगे पर उससे पहेल क्या हैं अपरा एकादशी ये करने से क्या फल प्राप्त होता हैं।

युधिष्ठिर के पूछने पर श्रीकृष्ण ने उनको बताया कि व्रत के प्रभाव से भूत-प्रेत जैसी निकृष्ट योनियों तथा ब्रम्हाहत्या तक के पाप से मुक्ति मिल जाती हैं। यह व्रत पाप रुपी वृक्ष को काटने के लिए, कुल्हाड़ी तथा पुण्यकर्मों की प्राप्ति के लिए किसी कल्पवृक्ष से कम नही हैं।

अपरा एकादशी व्रत कथा
महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था। राजा का छोटा भाई वज्रध्वज बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन अवसर पाकर इसने राजा की हत्या कर दी और जंगल में एक पीपल के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर पीपल पर रहने लगी। मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति को आत्मा परेशान करती। एक दिन एक ऋषि इस रास्ते से गुजर रहे थे। इन्होंने प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसके प्रेत बनने का कारण जाना।

ऋषि ने पीपल के पेड़ से राजा की प्रेतात्मा को नीचे उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया। राजा को प्रेत योनी से मुक्ति दिलाने के लिए ऋषि ने स्वयं अपरा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी के दिन व्रत पूरा होने पर व्रत का पुण्य प्रेत को दे दिया। एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त करके राजा प्रेतयोनी से मुक्त हो गया और स्वर्ग चला गया।

 

सृष्टि विश्वकर्मा..