बिजली के बिल के बाद मुलायम के मकान पर गिरी गाज

लखनऊ। योगी सरकार सत्ता में आने के बाद एक के बाद एक पूर्व सरकार के मंत्रियों और सपा नेताओं को झटका देने में लगी हुई है। योगी सरकार की ओर से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल और समेत परिवार के कई लोगों को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के आवसीय इमारतों के व्यवसायिक उपयोग के प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया है।

राजधानी लखनऊ में एलडीए के अध्यक्ष और लखनऊ के मण्डलायुक्त अनिल गर्ग की बैठक में रिहाय़शी इलाकों में बने 58 मकानों को व्यवसायिक उपयोग के प्रस्ताव को खारिज करते हुए मुलायम सिंह यादव के परिवार को बड़ा झटका दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस इलाके में करीब 71 लोगों ने अपने आवासीय मकानों के व्यवसायिक उपयोग के लिए एलडीए में आवेदन किया था। एलडीए ने इनमें से 58 रसूखदार लोगों का आवेदन स्वीकार कर उनके भू उपयोग प्रवर्तन का प्रस्ताव बनाया था।

इन लोगों के नाम है शुमार

इन रसूखदारों में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव, पत्नी साधना गुप्ता, समधी अरविंद बिष्ट, समधन अम्बी बिष्ट, एलडीए के पूर्व उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह और आवास विभाग के पूर्व सचिव व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी आईएएस अधिकारी पंधारी यादव के भी मकान थे।

ये सभी लोग अपने आवासीय मकानों का व्यवसायिक उपयोग करना चाहते थे। लेकिन, इन सब की मंशा पर पानी फेरते हुए लखनऊ के नये मण्डलायुक्त अनिल गर्ग ने सपा शासन के दौरान एलडीए द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।

गौरतलब है कि योगी सरकार की ओर से एक के बाद एक सपा सरकार के मंत्रियों को झटका दिया जा रहा है। जब से सत्ता हाथ से गई है तब से मुलायम सिंह यादव पर मुसीबतों का पहाड़ टूट रहा है। पिछले दिनों बिजली का तगड़ा झटका देते हुए इटावा में उनके घर पर छापेमारी की है। जांच में पता चला है उनके बंगले पर 5 किलोवॉट लोड का मीटर लगा था जबकि बिजली की खपत के हिसाब से 40 किलोवॉट का लोड है।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि मुलायम सिंह पर 4 लाख से ज्यादा बिजली की बिल भी बाकी है जिसे जमा करने के लिए बिजली विभाग ने 30 अप्रैल तक का समय दिया है। मुलायम सिंह की कोठी इटावा में बनी सबसे खूबसूरत बंगले में शुमार है। इस निर्माण करीबन 8 महीने पहले हुआ था तब इसका लोड 5 किलोवॉट स्वीकृत था। हालांकि लोड बढ़ाने के लिए मुलायम ने आवेदन को कर दिया था लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।

 आशु दास