स्वास्थ्य से लाचार है श्रीकृष्ण जन्मस्थली की सुरक्षा में तैनात सिपाही

मथुरा। मथुरा में सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील श्री कृष्ण जन्मस्थान के हाई सिक्योरटी जोन में पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहॉ पुलिस विभाग के आलाधिकारियो ने एक ऐसे सिपाही की तैनाती कर रखी है जिसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी है। मगर फिर भी वो सिपाही अधिकारियों के आदेश का पालन कर अपनी ड्यूटी निभा रहा है।


भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली हमेशा से करोडाें लोगो की आस्था का केंद्र रही है। वही सुरक्षा की दृष्टि से यह इलाका अति संवेदनशील माना जाता है यही वजह है यहाँ की सुरक्षा चाक चौबंद की जाती है लेकिन मथुरा पुलिस ने सुरक्षा के सभी नियमां और मानदंडों को ताक पर रखकर एक ऐसे सिपाही को यहाँ सुरक्षा में लगाया गया है जिसकी दोनों किडनियां पूरी तरह डैमेज है और उस बीमार सिपाही को एक हफ्ते में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है जिसके लिए उसे डॉक्टर द्वारा बेड रेस्ट की सलाह दी गयी है लेकिन हरनारायण नामक ये सिपाही आराम करने के वजाय ऐसी नाजुक स्थिति में भी अपनी जान को जोखिम में डाल कर अपने फर्ज को निभा रहा है।

अस्पताल के बेड पर इलाज करा रहा ये शख्स है उत्तर प्रदेश पुलिस का सिपाही हरनारायण मथुरा के अति संवेदनशील श्री कृष्ण जन्मस्थान पर वहां की सुरक्षा में तैनात है। हरनारायण की ड्यूटी जन्मस्थान परिसर में लगी है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदन शील है और रेड जोन एरिए में है जहाँ प्रदेश और देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियाँ सुरक्षा में लगी हुयी है वही करोड़ां रुपए का बजट भी सरकार द्वारा सुरक्षा के नाम पर यहाँ खर्च किया जाता है। वहीं मथुरा पुलिस प्रशासन द्वारा भगवान की सुरक्षा में चूक बरतते हुए वहाँ पर बेसहारा बेवस और दोनों किडनी फेल सिपाही को तैनात कर रखा है जो किसी अनहोनी की स्थिति में खुद ही लाचार है ।

हरनारायण और उनकी पत्नी की माने तो वो कई बार मथुरा के एसएसपी मोहित गुप्ता से मदद की गुहार लगाते हुए पुलिस लाइन में तेनाती और इलाज के बिल पास करने की फरियाद कर चुके है मगर एसएसपी साहब ने पीड़ित सिपाही की एक न सुनी साहब तो साहब आरके बाबू तो साहब से भी ऊपर निकल गये उसने इलाज खर्च के बिल महीनों चक्कर लगवाने के बाद भी बिना पास किये ही वापस कर दिए वही इलाज करने वाले डॉक्टर का कहना है ऐसी स्थिति में हार्ड वर्क करना खतरनाक हो सकता है। इन्हे आराम की जरूरत है।

-योगेश भरद्वाज