जाने डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में ये खास बातें….

नई दिल्ली। भारत के संविधान निर्माण में खास भूमिका निभाने वाले डॉ.भीमराव अंबेडकर का जन्म आज ही के दिन 14 अप्रैल सन्1891 मध्यप्रदेश के महू में हुआ था और उनके जन्मदिन के इस अवसर को भारत समेत पूरे विश्व में मनाया जाता है। बता दें की, भीमराव अंबेडकर को बाबसाहेब के नाम से भी जाना जाता है।

डॉ.भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन, समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रुप में भी मनाया जाता है, क्योंकि भीमराव अंबेडकर ने अपनी पूरी जिंदगी समानता के लिए संघर्ष करने में बिता दी। भीमराव पूरे विश्व में उनके मानवाधिकार आंदोलन, संविधान निर्माण और उनकी विद्वता के लिए जाने जाते हैं और ये दिन उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।

126वी अंबेडकर जयंती

इस साल डॉ.भीमराव अंबेडकर की 126वी जयंती मनाई जा रही है। बाबसाहेब के जन्मदिन को लोग 14 अप्रैल के दिन एक उत्सव के रुप में मनाते हैं। 1891 में भारत की भूमि पर जन्में भीमराव अंबेडकर, भारत के लिए एक सौगात थे। पूरे भारत में वाराणसी, दिल्ली समेत दूसरे बड़े शहरों, जिलों और गांव सब जगह ही अंबेडकर जयंती बहुत धूम-धाम से जश्न के रूप में मनाई जाती है। इस उत्सव को मनाने के लिए लखनऊ में भारतीय लोक कल्याण के पत्रकार हर साल एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

क्यों मनाई जाती है अंबेडकर जयंती

भारत में लोग अंबेडकर जयंती को डॉ.अंबेडकर द्वारा देश के लिए किए गए योगदान को याद करने के लिए बढ़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के पिता माने जाते है। उन्होनें ही भारत के संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया था और वो एक मानवाधिकार कार्यकर्ता भी थे। सन् 1923 में भीमराव अंबेडकर ने निम्न स्तर के लोगों की आर्थिक स्थिति को बढ़ाने के साथ शिक्षा की जरुरत के लक्ष्य को फैलाने के लिए “बहिष्कार हितकारी” सभा की स्थापना की थी। अंबेडकर ने जातिवाद को जड़ से हटाने के लिए शिक्षित करना-आंदोलन करना-संगठित करना का नारा दिया था।

भीमराव ने अस्पृश्य लोगों को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए महाराष्ट्र के महाड में सन् 1927 में एक मार्च का नेत्रत्व किया था जिन्हें “सार्वजनिक चॉदर झील” के पानी को छूने या पीने की अनुमति नहीं थी। इन्होने ही जाति विरोधी आंदोलन, पुजारी विरोधी आंदोलन, और मंदिर में प्रवेश आंदोलन जैसे बहुत से सामाजिक आंदोलनों का नेत्रत्व किया था। अंबेडकर ने ही समाज में दलित वर्ग के हक के लिए सामाजिक क्रांति शुरु की थी। राष्ट्र के लिए किए गए अंबेडकर के योगदान को सन् 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

6 दिसंबर 1956 को हमारे देश ने तब एक अनमोल हीरा खो दिया जब डॉ अम्बेडकर ने अपनी अंतिम साँस ली। हमारा देश शायद ही कभी इस क्षति की पूर्ति कर सकेगा।