रामनगरी अयोध्या में मनाई गई 1.25 करोड़ की भव्य दीपावली के पीछे का सच

नई दिल्ली। बीती 18 तारीख को अयोध्या ने ही नहीं बल्कि भारत समेत पूरे विश्व ने रामनगरी में त्रेता की याद को ताजा कर प्रदेश सरकार ने जमकर वाह वाही लूटी । सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान आये लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब तक गरीब के घर में चूल्हा ना जले और उसका घर रोशन ना हो तब तक राम राज्य नहीं आया है। हम ऐसा ही राम राज्य लाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

उन्होने प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार की कई जनोपयोगी योजनाओं का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होने कई योजनाओं के लाभार्थियों योजना के चेक और प्रमाण पत्र भी बांटे। इस पूरे आयोजन की ऐतिहासिकता और भव्यता बनाने के लिए रामनगरी को महीने भर पहले से ही सजाया जाने लगा था।

हर दस कदम पर तोरण द्वार बनाए गए थे। पूरे अयोध्या में अभूतपूर्व लाइटिंग की व्यवस्था की गई थी। पूरी रामनगरी के मुख्य मार्गों को एक ही ढंग और रंग से सजाया गया था। फैजाबाद ही नहीं बल्कि कई जिलों की पुलिस को इस विशेष आयोजन में सुरक्षा के लिए लगाया गया था। मर्यादा पुरूषोत्तम राम की जीवन पर आधारित झांकियों के साथ प्रदेश की कई संस्कृतियों की विशेष झांकियां सजाई गई थीं।

बताया जा रहा है कि इस पूरे भव्य आयोजन में त्रेता की याद के लिए पुष्पक विमान के तौर पर हेलीकाप्टर का इस्तेमाल किया गया योगी जी आये राम लक्ष्मण सीता भी आये सम्मान हुआ मां सरयू की भव्य आरती हुई लेकिन ढाक के तीन पात की कहावत योगी के जाने के बाद कुछ इस तरह से सामने आई जिसको देखकर इंसानियत की आंखों से खून निकल उठा।

जिस मंच से सीएम योगी राम राज्य का पाठ लोगों को पढ़ा रहे थे उसी मंच के करीब में स्थित राम की पैड़ी पर दीपदान का आयोजन किया गया था। वहीं पर लेजर लाइट शो भी होना था। वहीं पर गिनीस बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना । लेकिन योगी गए अधिकारी गए अयोध्या ने दीपावली मनाई। अगली सुबह अपने घरों में दीपक जलाने और खाने के लिए तेज ढूंढती जनता की कुछ तस्वीरें भी अब सामने आई हैं। ये तस्वीरें उसी स्थल की हैं जिस स्थल पर एक ऐतिहासिक आयोजन हुआ था। आज वहां पर बचे दियों से कुछ बेसहारा और गरीब जनता तेज एकत्रित कर अपना भोजन तलाश रही है। अब इसे राम राज्य की परिकल्पना कहें या केवल जुमला क्योंकि राम राज्य की जो परिकल्पना गोस्वामी तुलसी दास ने रामचरित्र मानस में ही है कि दैहिक दैविक भौतिक ताप राम राज्य काहू नहि व्यापा शायद ये यहां तो देखने को नहीं मिली है।