जानिए भगवान शिव के पूरे रुप के पीछे छिपा रहस्य

नई दिल्ली। भगवान शिव को सभी देवों का देव कहा गया है उनके रुप को देखकर हमेशा से ही अलौकिक अनुभव की अनुभूति होती है। हाथ में त्रिशूल और डमरु, गले में रुद्राक्ष और सांप की माला, माथे पर चंद्र धारण करते है जिसे देखकर हमेशा ही ये सवाल कई लोगों के मन में उठता है आखिर भगवान शिव इस सब चीजों को क्यों धारण करते है और इसका मतलब क्या है तो चलिए आज हम आपको इन सभी चीजों के मतलब बताते हैं।

-सबसे पहले हाथ में धारण किए हुए त्रिशूल की बात करते हैं। कहा जाता है कि शिव जी का ये त्रिशूल तीन शक्तियों का प्रतीक है जो कि ज्ञान, इच्छा और परिपालन है।

-भगवान शिव के त्रिशूल में डमरु बंधा होता है। ऐसा मानते है कि उनका डमरु वेदों और उपदेशों की ध्वनि का प्रतीक है जो हमें जिंदगी की राह दिखाते है।

-रुद्राक्ष को शुद्धता का प्रतीक कहा जाता है। अगर आप भगवान शिव के रुप को देखेंगे तो उनके दाहिने हाथ में रुद्राक्ष की माला है जो कि ध्यान मुद्रा का सूचक है।

-शिव जी गले में रुद्राक्ष की माला के साख-साथ नाग को भी माला के समान पहने हुए है। कहा जाता है कि उनके गले में लटका नाग पुरुष के अहम का सूचक है।

-शिव जी की जटाओं में देवी गंगा को स्थान दिया है और उनकी जटाओं में दिखता चेहरा मां गंगा ही हैं।

-शिव जी के माथे पर बना तीसरा नेत्र ज्ञान का सूचक है। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान क्रोधित होते हैं तो उनका तीसरा नेत्र खुलता है और सब कुछ तहस-नहस हो जाता है लेकिन इस नेत्र को ज्ञान का प्रतीक मानते है।

-भगवान शिव ने बाघ की खाल को धारण किया हुआ है यहां तक की वो इस पर विराजमान भी होते है। ये निडरता का प्रतीक है।

-चंद्रमा को वैसे तो शीतलता का प्रतीक माना जाता है लेकिन शिव के माथे पर सजा चंद्रमा बताता है कि काल पूरी तरह से उनके बस में है।