जानिए आखिर नेता से हिस्ट्री शीटर कैसे बना शहाबुद्दीन !

सीवान। 11 साल आरजेडी के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन भागलपुर जेल से शनिवार को रिहा हो गए और भारी संख्या में उनके समर्थकों ने अपने नेता का स्वागत किया। शहाबुद्दीन को हत्या के मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया है। इस बाहुबली नेता के जेल से रिहा होते ही राजनीतिक सरगर्मीं काफी बढ़ गई है और आरोपों का दौर एक बार फिर से शुरु हो गया। वहीं शहाबुद्दीन ने जेल से रिहा होते ही सत्ता को झंझोरने वाले कुछ बयान मीडिया के सामने दिए है जिसमें उसने कहा है कि उसके नेता सिर्फ और सिर्फ आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव है और नीतीश कुमार केवल परिस्थितियों के मुख्यमंत्री है।

बाहूबली नेता के इस बयान ने बिहार सरकार  में हलचल शुरु हो गई है तो वहीं नेता की रिहाई को लेकर भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों ने भी नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। लेकिन इस बाहुबली नेता की रिहाई के बाद जनता के मन में कुशासन व्यवस्था का डर बैठने लगा है।

बरहाल, आइए आपको बताते हैं कौन है शहाबुद्दीन? आखिर क्‍यों पूरे देश में शहाबुद्दीन बाहूबली नेता के रुप में मशहूर हो चुका है और इसके रहते लालू प्रसाद सरकार को लोग जंगलराज के नाम से क्यों जानने लगे।

जानिए शहाबुद्दीन की आपराधिक दुनिया के बारे में :-

– 19 साल की उम्र में शहाबुद्दीन के ऊपर 1986 में पहली बार आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था।

– 80 के दशक में आपराधिक दुनिया में कदम रखने वाला शहाबुद्दीन जल्द ही इस क्षेत्र का जाना माना नाम हो गया।

– इस बाहुबली के हौसले और आपराधिक क्षेत्र में ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जल्द ही पुलिस ने सीवान के हुसैनगंज थाने में शहाबुद्दीन को ए श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया था।

– आरजेडी सरकार के संरक्षण में शहाबुद्दीन सीवान को अपनी जागीर समझने लगा और उसके बिना क्षेत्र का एक पत्ता भी नहीं हिलता था।

– सिवान के लोग शहाबुद्दीन के नाम से ही कांप उठते थे।

– ऐसा कहा जाता है कि शहाबुद्दीन के खौफ के सामने प्रशासन ने घुटने टेक दिए और दबंगई के दम पर सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले इस बाहुबली को संरक्षण देने लगी।

– शहाबुद्दीन पर एक साथ कई मामले चल रहे हैं और कई मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है।

– 2004 में चुनाव से ठीक 8 महीने पहले इस बाहुबली को 1999 में एक सीपीआई (एमएल) कार्यकर्ता के अपहरण और संदिग्ध हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया।

– मार्च 2001 में आरजेडी के स्थानीय अध्यक्ष मनोज कुमार पप्पू के खिलाफ एक वारंट लेकर गिरफ्तारी करने पहुंचे पुलिस अधिकारी संजीव कुमार को शहाबुद्दीन ने न सिर्फ थप्पड़ मार दिया बल्कि समर्थकों से पुलिस वालों की पिटाई भी करवा दी।

– एके-47 राइफल्स रखने का भी आरोप है जिस पर पाकिस्तानी मुहर लगी थी और उस समय बिहार के डीजीपी डीपी ओझा ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट में इस बात से अवगत कराया की शहाबुद्दीन के संबंध आईएसआई से संबंध है।

– शहाबुद्दीन के खिलाफ सबसे बड़ा तेजाब कांड का आरोप है जिसमें उसे उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है।

– 2004 में 16 अगस्त को अंजाम दिए गए इस दोहरे हत्याकांड में सीवान के एक व्यवसायी चंद्रकेश्वर उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों सतीश राज (23) और गिरीश राज (18) को अपहरण के बाद तेजाब से नहला दिया गया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।

– इस हत्याकांड के चश्मदीद गवाह चंदा बाबू के सबसे बड़े बेटे राजीव रोशन (36) थे लेकिन मामला की सुनवाई के दौरान 16 जून, 2014 को साढ़े आठ बजे रात में अपराधियों ने राजीव की गोली मारकर हत्या कर दी।

– शहाबुद्दीन के ऊपर करीब तीन दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

– ट्रायल कोर्ट के गठन के बाद 12 मामलों का फैसला आ चुका है जिसमें आठ मामलों में एक साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो चुकी है।

– मार्च 1997 में जवाहर लाल नेहरू विवि छात्र संघ के अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर को सीवान में तब गोलियों से छलनी कर दिया गया था, जब वह भाकपा माले के एक कार्यक्रम के सिलसिले में नुक्कड़ सभा कर रहे थे।

– भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता छोटे लाल गुप्ता के अपहरण और हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।