अयोध्या में विवादित ढांचे के बारे में जानें कब क्या हुआ ?

नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पीसी घोष और न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन की संयुक्त पीठ ने सीबीआई की अपील पर फैसला सुनाया कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि स्पेशल कोर्ट 2 साल में मामले की सुनवाई पूरी करे।

इसके साथ ही इस केस को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया है। जहां तक सुनवाई रायबरेली में हो गई थी, उससे आगे की सुनवाई वहां होगी। साथ ही मामले से जुड़े जजों के तबादले पर रोक लगा दी गई है। सीबीआई को आदेश दिया है कि इस मामले में रोज उनका वकील कोर्ट में मौजूद रहेगा। कल्याण सिंह को राज्यपाल के पद पर रहने तक ट्रायल से छूट दी गई है।

विवाद से जुड़े अहम घटनाक्रम-

1528 : अयोध्या में मुगल शासक सम्राट बाबर ने मस्जिद बनवाई थी, जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।

1853 : अंग्रेजों के शासनकाल में पहली बार अयोध्या में सांप्रदायिक दंगे हुए।

1859 : अंग्रेजों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।

1885ः महन्त रघुवरदास ने फैजाबाद अदालत में राम मन्दिर के निर्माण की इजाज़त के लिए अपील दायर की।

23 दिसम्बर 1949 : भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गयीं। दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर किया जिसके यहां ताला लगा दिया गया।

1984 : विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नेतृत्व में राम मन्दिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया गया।

16 जनवरी : 1950 गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में अपील दायर कर रामलला की पूजा की इजाज़त मांगी।

17 दिसम्बर 1959 : निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।

18 दिसम्बर 1961 : उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित ढांच के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।

07 सितम्बर 1984 : विहिप ने विवादित ढांचा क ताले खोलने और राम मन्दिर बनाने के लिए अभियान शुरू किया।

01 फरवरी 1986 : जिला मजिस्ट्रेट ने हिन्दुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे पर से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।

जून 1989 : विहिप ने राम मन्दिर निर्माण के लिए विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी।

01 जुलाई 1989 : रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया।

09 नवम्बर 1989 : तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने विवादित ढांचे के नजदीक शिलान्यास की इजाज़त दी।

25 सितम्बर 1990 : लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली।

अक्टूबर 1991 : उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने विवादित परिसर के पास की 6.67 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में लिया।

03 अक्टूबर एवं 02 नवम्बर 1990 : इन घटनाओं में कारसेवा के दौरान उग्र भीड़ ने विवादित इमारत पर धावा बोला। जिसमें सुरक्षा बलों की गोली से कई कारसेवकों की मौत हुई।

06 दिसम्बर 1992 : कारसेवकों के आन्दोलन के दौरान 06 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

16 दिसम्बर 1992 : ध्वस्तीकरण की स्थितियों की जांच के लिए एमएस लिब्रहान आयोग गठित

2001 : अटल सरकार के समय बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर विहिप ने विवादित स्थल पर राम मन्दिर निर्माण करने के अपना संकल्प दोहराया।

जनवरी 2002 : अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया।

13 मार्च, 2002 : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। केन्द्र सरकार ने कहा कि कोर्ट के फैसले को माना जाएगा।

अप्रैल 2002 : विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।

अप्रैल 2003 : इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मन्दिर से मिलते जुलते अवशेष मिले हैं। मुस्लिम पक्ष इससे सहमत नहीं दिखा।

मई 2003 : सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किए।

अगस्त 2003 : भाजपा नेता और उप प्रधानमंत्री ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मन्दिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए।

अप्रैल 2004 : आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममन्दिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण ज़रूर किया जाएगा।

जनवरी 2005 : लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया।

05 जुलाई 2005 : पांच हथियारबंद संदिग्ध आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप के जरिए विवादित परिसर पर हमला किया जिसमें पांच आतंकी बाहरी सुरक्षा घेरे के नज़दीक ही मार डाले गए।

30 जून 2009 : बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी।

24 नवम्बर, 2009 : लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गई।

30 सितम्बर, 2010 : रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी। हाईकोर्ट ने विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया।

2011 : सुप्रीम कोर्ट नें हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया।

21 मार्च 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता सुझाया।

19 अप्रैल 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों पर आपराधिक साजिश का केस चलाने का फैसला सुनाया। राजस्थान के राज्यपाल होने के कारण कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट प्राप्त है और उनके कार्यालय छोड़ने के बाद ही उनके खिलाफ मामला चलाया जा सकता है।