कलराज मिश्र ने बांटे 2015 राष्‍ट्रीय एमएसएमई पुरस्‍कार

नई दिल्ली। राष्‍ट्रीय एमएसएमई पुरस्‍कार समारोह 2015 मंगलवार को यहां आयोजित किया गया। केन्‍द्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने एमएसएमई पुरस्‍कार 2015 प्रदान किये। संयुक्‍त राष्‍ट्र ने जब से 27 जून को संयुक्‍त राष्‍ट्र एमएसएमई दिवस घोषित किया है, तब से लेकर अब तक सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय इस दिन का चयन एमएसएमई को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्रदान करने के लिए करता आया है।


इस पुरस्‍कार समारोह का आयोजन एमएसएमई क्षेत्र में उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले उन उद्यमों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करने के लिए किया जाता है जो राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। एमएसएमई राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह और हरिभाई पी.चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। एमएसएमई सचिव के.के. जालान, विकास आयुक्‍त सुरेन्‍द्र नाथ त्रिपाठी, केवीआईसी के अध्‍यक्ष विनय कुमार सक्‍सेना और कॉयर बोर्ड के अध्‍यक्ष सी.पी. राधाकृष्‍णन भी इस अवसर पर मौजूद थे।
इस अवसर पर केन्‍द्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र ने ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ का भी शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्‍होंने एसएपी इंडिया, इंटेल और एचएमटी को तीन सहमति पत्र (एमओयू) सौंपे। इन कदमों से डिजिटल इंडिया मिशन को सफल बनाने की दिशा में मंत्रालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी।
डिजिटल एमएसएमई योजना क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग पर केन्द्रित है, जो एमएसएमई द्वारा अपने यहां स्‍थापित किये गये आईटी बुनियादी ढांचे की तुलना में एक किफायती एवं लाभप्रद विकल्‍प के रूप में उभर कर सामने आई है। क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत एमएसएमई अपनी कारोबारी प्रक्रियाओं के समुचित प्रबंधन के लिए साझा एवं खुद के लिए स्‍थापित किये गये सॉफ्टवेयर सहित आईटी बुनियादी ढांचे तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने हेतु इंटनेट का इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग के तहत हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर कुछ भी निवेश नहीं करना पड़ता है।

अत: ‘कैपेक्‍स’ ऐसी स्थिति में ‘ओपेक्‍स’ में परिवर्तित हो जाता है। इस योजना से एमएसएमई अपने यहां सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को उपयोग में लाने के लिए इस नई अवधारणा अर्थात क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
केन्‍द्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र ने इस अवसर पर यह जानकारी दी कि वर्ष 2015 में विभिन्‍न श्रेणियों के तहत राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं की कुल संख्‍या 56 है, जिनमें एमएसएमई के लिए 50 और बैंकों के लिए 6 पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ता शामिल हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि एमएसएमई मंत्रालय माननीय प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप अथक प्रयास कर रहा है। उन्‍होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट उपलब्धियां हासिल करने वाले पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी और उम्‍मीद जताई कि इस क्षेत्र के अन्‍य उद्यम भी पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं द्वारा स्‍थापित किये गये उदाहरणों का अनुकरण करेंगे।
केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री हरिभाई पी.चौधरी ने कहा कि एमएसएमई की अहमियत और भारत के आर्थिक-सामाजिक विकास में उनके उल्‍लेखनीय योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है। खादी एवं ग्रामीण उद्योगों और कॉयर क्षेत्र सहित एमएसएमई सेक्‍टर कृषि के बाद सबसे बड़ा नियोक्‍ता है। हाल के वर्षों में एमएसएमई ने 10 फीसदी से भी ज्‍यादा की वृद्धि दर दर्शाई है, जो बड़ी कंपनियों द्वारा दर्ज की गई वृद्धि दर से भी ज्‍यादा है।
केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय ने माननीय प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप ‘कारोबार करने में आसानी’ और डिजिटल इंडिया मिशन को ध्‍यान में रखते हुए अनेक कदम उठाये हैं। सितम्‍बर, 2015 में लांच किये गये उद्योग आधार ज्ञापन को कुछ ही मिनटों में बगैर किसी शुल्‍क के दाखिल किया जा सकता है। एमएसएमई इसके अलावा इस मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही सभी योजनाओं के बारे में विभिन्‍न जानकारियां एकल खिड़की अर्थात मोबाइल एप ‘माईएमएसएमई’ पर प्राप्‍त कर सकते हैं।