चाय की केतली से लेकर…पीएम पद तक का सफर…नरेंद्र दामोदरदास मोदी

स्वतंत्र भारत के सबसे सशक्त और कर्मनिष्ट प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित करते  नरेंद्र दामोदरदास मोदी आज अपना 66वां जन्मदिवस मना रहे हैं। भारत के मौजूदा राजनीति में सबसे कर्मठ और सफल राजनेता माने जा रहे मोदी ने ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व को अपने राजनीति और कूटनीति का लोहा मनवाया है, यह इसी बात से स्पष्ट है कि आज भारत विश्व में तेजी से उभरती शक्ति बन रहा है और अन्य देश भारत से अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश में हैं।

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एक चाय बनाने वाला कैसे अपने मेहनत और लगन से देश के सर्वाच्च पद पर पहुंच सकता है, यह कोई भी नरेंद्र मोदी से सीख सकता है, उनका जीवन किसी के लिए भी प्रेरणा श्रोत बन सकता है, आइए नजर डालते है देश के सबसे सशक्त राजनेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवनकाल पर-

मोदी का जीवनकाल-
नरेंद्र मोदी का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। बचपन से ही वें कर्मठ और जुझारु छात्र के रुप में जाने जाने लगे। बचपन से ही मोदी का लगाव आधयात्म की तरफ रहा। बचपन में नरेंद्र मोदी को साधु संतों को देखना बहुत अच्छा लगता था, मोदी खुद संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे। आरएसएस की विचारधाराओं ने मोदी को बहुत प्रभावित किया इसी का असर रहा कि महज 17 साल की उम्र में मोदी वर्ष 1967 में अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदसय बने जहां उन्होने अपने पूरी लगन से काम किया, उसके पश्चात वें 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। अब तक वे आरएसएस के जाने माने प्रचारक के रुप में लोगों के सामने आ चुके थे। मोदी का नाम धीरे धीरे स्थानीय राजनीति में अब मजबूत होने लगा था, इसके पश्चात उन्होने वर्ष 1980 में गुजरात की राजनीति में कदम रखते हुए गुजरात भाजपा ईकाई में अपना कदम रखा।वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए।

राजनीति में मोदी का कदम-
अब मोदी के लिए वह दौर प्रारंभ हो चुका था जो उनके लिए राजनीति में आगे का रास्ता साफ करने वाला था, 1990 में मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए। मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया।इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया, इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे।

चुनौतियों से भरा रहा मोदी के राजनैतिक पदार्पण का समय-
गुजरात की राजनीति की शुरुआत मोदी के लिए इतनी आसान नहीं रही, हालांकि 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान पहली बार सौप सौंपी गई, यह वही दौर था जब गुजरात के कक्ष में भयंकर भूकंप आया था जिसमें कई हजारों लोगों की जान गई। मोदी के लिए चुनौतियों की यह शुरुआत थी, सत्ता संभालने के महज पांच महीने बाद ही गोधरा रेल हादसा हुआ जिसमें कई हिंदू कारसेवक मारे गए, इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ दंगे भड़क उठे। इन दंगों में सरकार के मुताबिक एक हजार से ज्यादा और ब्रिटिश उच्चायोग की एक स्वतंत्र समिति के अनुसार लगभग 2000 लोग मारे गए, इनमें ज्यादातर मुसलमान थे। यहां से मोदी की असली अग्नि परीक्षा प्रारंभ हुई, दंगों को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौर किया तो उन्होंनें उन्हें ‘राजधर्म निभाने’ की सलाह दी जिसे वाजपेयी की नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया साथ ही मोदी पर आरोप लगे कि वे दंगों को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया। मामला इतना गंभीर हो चुका था कि पद से मोदी को हटाने की बात चलने लगी, विरोधियों ने सवाल उठाने शुरु कर दिए, इस समय उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का मोदी को साथ मिला और उनके समर्थन से वे पद पर बने रहे।

पहली बार बने देश के प्रधानमंत्री-
मोदी पर आरोप लगते रहे लेकिन राज्य की राजनीति पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई। मोदी के खिलाफ दंगों से संबंधित कोई आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए हैं। महत्वपूर्ण है कि दंगों के चंद महीनों के बाद ही जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की थी गौर करने वाली बात यह भी रही कि उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया और फिर जीतकर लौटे। फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में विजयी रहे।

वर्ष 2014 में जब मोदी का नाम भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के तौर पर सामने रखा लोगो ने उनका जमकर समर्थन किया जिसका परिणाम रहा कि एनडीए ने पूर्ण्ा बहुमत के साथ सरकार बनाई। एनडीए को इतनी बड़ी विजय दिलाने के लिए मोदी ने स्वयं के कंधे पर पार्टी का भार संभाला और अपने शक्ति का परिचय कराते हुए देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि मोदी का विरोध होता रहा पर उनके काम और देश के प्रति समर्पण ने लोगों को उनका कायल बना रखा है और उनको देश का ही नहीं विश्व के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियो में से एक माना जा रहा है।