जेवर कांड: पुलिस के घेरे में बावरिया गिरोह

नोएडाजेवर-बुलंदशहर राजमार्ग पर हुई डकैती और सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस के हाथ अभी तक खाली नजर आ रहे है। घटना स्थल  से किसी भी मोबाइल फोन का कॉल रिकॉर्ड नहीं मिलने से इस मामले में पुलिस को निराशा हाथ लगी है। पुलिस 25 मई को जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस पर हुई लूट-पाट की वारदात के पांच अपराधियों को पकड़ने के लिए अपने सूचना नेटवर्क पर ही निर्भर है।

जेवर पुलिस के घेरे में आ रहा बावरिया गैंग पुलिस सूत्रों की मानें तो घटना को बावरिया गिरोह ने ही अंजाम दिया है। जांच के लिए गठित की गई टीम ने जेल में बंद और बाहर रहने वाले बावरिया से भी पूछताछ की तो उन लोगों ने कुछ जानकारी दी है। जिसके आधार पर टीम आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

 

पूरा मामला यह है की 25 मई को आठ व्यक्ति बुलंदशहर जा रहे थे, जिनसे जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस पर लूटपाट की गई,और लूट-पाट के साथ ही चार महिलाओं के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म भी किया गया जबकि एक पुरष की अपराधियों ने हत्या कर थी। यूपी पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है की अपराधियों ने अपराध के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया था।

जेवर पुलिस और उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल दल ने अपराध स्थल क्षेत्र में 25 मई की रात 1 बजे से सुबह 4  बजे तक के बीच हुई सभी कॉल डिटेल की जांच की लेकिन पुलिस के हाथ कुछ भी नयी लगा क्योंकि आपराधिक घटना के दौरान अपराधियों ने किसी भी मोबाईल फोन का इस्तेमाल नहीं किया था।

पुलिस ने पीड़ितों को 100 संदिग्ध लोगों की तस्वीरें भी दिखाई है लेकिन वह अपराधियों को पहचानने में नाकामयाब रहे है । अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों का कहना है कि अपराध के समय काफी अंधेरा था जिससे अपराधियों की पहचान तस्वीर से करना मुश्किल है। वहीं पीड़ित के परिवार के लोगों ने जेवर तहसील में प्रदर्शन किया और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की ,उन्होंने न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या की धमकी भी दी है.

वहीं 26 मई को पुलिस ने चार लोगों को यमुना एक्सप्रेस वे पर लूटपाट और कथित बलात्कार की घटना में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. जेवर के पुलिस उपाधीक्षक दिलीप सिंह ने कहा की  संदिग्ध्य लोगों से भी पूछताछ हो रही है