मोटी रकम जमा होते ही जनधन खाते हुए सील, गरीबों को झेलना पड़ा नुकसान

नई दिल्ली। भारत में पैर पसार चुके कालेधन को समेटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी का फैसला लिया गया। नोटबंदी के बाद टैक्स चोरी कर छुपा कर पैसे रखने वालों के पसीने छुटने लगे कालेधन को सफेद में तब्दील कराने के लिए बड़े कारोबारियों ने लालच देकर गरीब जनता के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर करना शुरू किया। अचानक से गरीब जनता के खाते में मोटी रकम जमा होनी शुरू हो गई।
जैसे ही सरकार को इस बात की भनक लगी उन्होंने इस पर लगाम कसना शुरू कर दिया। राज्यों की सूची पर नजर डालें तो सिर्फ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में ही 7 हजार जनधन खातों को फ्रीज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक इन 7 हजार जनधन खातों में कुल 1300 करोड़ रुपए जमा करवाए गए। कालेधन को जनधन खाते में ट्रांसफर कराने में सबसे आगे रहा ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल यहां पर सबसे ज्यादा 21 हजार करोड़ रुपए बैंक खाते में जमा करवाई गई।
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हालांकि सरकार द्वारा पहले ही स्पष्ट किया जा चुका था कि यदि जनधन खाते में 50 हजार से ज्यादा की रकम डाली जाती है तो उस पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाबजूद खातों में पैसे डाले गए। रिपोर्ट में इस बात को भी स्पष्ट किया गया है कि 8 नवंबर से लेकर 22 नवंबर तक के दो सप्ताहों में देशभर में जो भी लेनदेन किया गया है उसमें से करीब 87 प्रतिशत लेनदेन जयपुर में हुआ था। अगर इसे पैसों में तब्दील किया जाए तो दो सप्ताह के भीतर जयपुर में 47 हजार 201 करोड़ का लेनदेन हुआ। इन दिनों जयपुर देश की आर्थिक राजधानी बन गई थी अगर ऐसा कहा जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं है। नोटबंदी के बाद पहले दो हफ्तों में राजस्थान की राजधानी में 30 हजार 542 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ।
जबकि पूरे भारत में इस दौरान ट्रांजेक्शन की राशि महज 35 हजार करोड़ रुपए थी। बता दें कि इस लेने देने में 11 हजार करोड़ की राशि का लेने देने बिना पैन कार्ड यानि कि परमानेंट अकाउंट नंबर के हुआ है।
भोले-भाले मजदूर बने निशाना
केंद्र सरकार के इस कदम के बाद कालाधन रखने वालों ने गरीब जनता को अपना निशाना बनाया, जिससे उसको नुकसान हुआ। गरीब जनता ने लालच में आकर मोटी रकम तो खाते में जमा करवा दी, मोटी रकम जमा होते ही खातों को केंद्र सरकार ने सील कर दिया।
खाते के सील होने से कालाधन जमा करवाने वालों को तो नुकसान नहीं हुआ लेकिन अगर उस खाते में 5 हजार रुपए भी गरीब किसान, मजदूर का जमा हुआ होगा तो उसे इस पैसे को दोबारा कमाने के लिए दोबारा से जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
4 पैसे के लालच ने बर्बाद की हजारों की कमाई
बड़े-बुजुर्गो ने सही कहा है लालच बुरी बला है। कालेधन को सफेद करने के लिए पैसे को गरीब जनता के खातों में जमा करवा दिय़ा गया है, गरीब जनता भी झांसे में आ गई और मेहनत की कमाई के खातों में पैसा जमा करवा दिया गया है। चंद रुपयों की लालच में जो अपने पैसे थे वो भी चले गए।