तमिलनाडु में सियासी-कलह, दो फाड़ हो गई है एआईएडीएमके

तमिलनाडु में पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत के बाद से राजनीति ने अलग मोड़ लेना शुरु कर दिया है। पार्टी ने अम्मा के आखिरी दिनो में ओ पन्नीरसेल्वम को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया लेकिन एआईडीएमके में राजनीतिक खलल फिर कुछ दिनों बाद ही उठ खड़ी हुई जब जयललिता की करीबी रहीं शशिकला का राजनीति में प्रवेश हुआ। शशिकला का राजनीतिक कदम इतना प्रभावी रहा कि पार्टी में उन्हें सीएम बनाने की मांग तेज होने लगी, लेकिन इसी बीच जयललिता की भतीजी दीपा ने शशिकला का विरोध करना शुरु कर दिया, हालांकि इसका कुछ ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा और शशिकला को पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया गया।

तमिलनाडु में ऐसा रहा राजनीतिक क्रम-

शशिकला पार्टी महासचिव नियुक्त- तमिल की राजनीति में एक नया मोड तब आया जब पार्टी महासचिव की कुर्सी चिनम्मा को सौंपी गई, चिनम्मा को एआईएडीएमके विधायकों का भी समर्थन मिला। 29 दिसंबर 2016 को पार्टी महासचिव बनाए जाने के बाद शशिकला ने अम्मा को याद करते हुए कहा कि पार्टी में उनका स्थान ले पाना किसी के लिए संभव नहीं है। शशिकला की नियुक्ति के लिए एआईएडीएमके के 2770 सदस्य एवं कार्यकारी परिषद के 280 सदस्यों की बैठक बुलाई गई, इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम, कैबिनेट मंत्री एम. थंबीदुरई और पार्टी विधायक भी मौजूद रहे।

 

चिनम्मा को सीएम बनाने की उठने लगी मांग- शशिकला को पार्टी महासचिव बनाए जाने के बाद लगातार उन्हें सीएम बनाए जाने की आवाजें उठने लगीं। एआईडीएम के शीर्ष सदस्य और लोकसभा सांसद एम थम्बीदुरई ने इस बात की मांग की, उन्होंने कहा कि शशिकला को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाए, पार्टी के भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि पार्टी और सरकार के बीच सामंजस्य को बनाए रखना जरुरी है। उन्होंने कहा है कि पार्टी तथा सरकार के लिए अलग-अलग सत्ताकेंद्र हो यह पार्टी के लिए हित में नहीं है, उन्होंने इसके साथ ही कहा है कि जब भी सरकार और पार्टी की बागडोर में अलग अलग व्यक्ति रहे हैं, ऐसे में सरकार ने लोगों में अपनी विश्वसनीयता खोई है।

तमिलनाडु की राजनीति में उस समय नया मोड़ आया जब पार्टी ने शशिकला को सीएम बनाने के लिए विधायकों की 5 फरवरी को बैठक बुलाई गई, इस बैठक में शशिकला को पार्टी विधायकों का समर्थन मिला और सर्वसम्मति से उन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया गया, ऐसे मे यह बात स्पष्ट हो गई कि अब जल्द ही चिनम्मा तमिलनाडु सीएम पद का शपथ लेंगी, इसबीच राज्य के मौजूदा सीएम पन्नीरसेल्वम ने निजी कारण बताते हुए सीएम पद से इस्तीफा भी दे दिया। पार्टी में अब तक सबकुछ बहुत ही सहज प्रतीत हो रहा था लेकिन असलियत इससे कहीं अलग था, पार्टी में विधायक दल की नेता चुनी जाने के बाद जब शशिकला को सीएम बनाने का ऐलान कर दिया गया, इसी बीच विरोध का अंकुर फूटा जब एक निजी संस्थान द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका दायर करते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता और शशिकला के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट एक सप्ताह के अंदर फैसला सुनाने वाला है ऐसे में शशिकला को शपथ लेने से रोका जाए। इस याचिका ने शशिकला और सीएम कुर्सी के बीच रोड़ा लगा दिया।

पार्टी में दिखा दो फाड़- पार्टी में अब तक सबकुछ सही चल रहा था लेकिन कुर्सी की लड़ाई ने पार्टी को दो टुकड़ों में बांट दिया, यह तब हुआ सीएम पन्नीरसेल्वम ने शशिकला को लेकर मोर्चा खोल दिया, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके पन्नीरसेल्वम ने पार्टी महासचिव शशिकला के खिलाफ मोर्चा करते हुए कहा है कि उनसे जबरन इस्तीफा लिया गया है। जयललिता की समाधि पर तकरीबन 40 मिनट तक मौन बैठने के बाद पन्नीर ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। मौन खत्म करते हुए पन्नीर ने कहा कि अम्मा की आत्म ने उन्हें समाधि पर बुलाया है।उन्होंने कहा “अम्मा ने मुझे ही सीएम बनने को कहा था। अंतरात्मा कचोट रही थी इसलिए सच्चाई कहने आया। अम्मा की मौत के बाद मैं सीएम नहीं बनना चाहता था पर अन्नाद्रमुक अध्यक्षमंडल के चेयरमैन ने मनाया और सीएम बनने को कहा पर अब मुझे अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश की जनता चाहेगी तो वो अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे। पन्नीरसेल्वम ने कहा कि जब अम्मा का इलाज अपोलो में चल रहा था, तो पार्टी नेताओं ने मुझे सीएम बनने को कहा। उन्होंने दावा किया कि वह सीएम बनने को तैयार नहीं थे लेकिन पार्टी को शर्म और संकट से बचाने के लिए सीएम बनना पड़ा। उनके शपथ लेने के 2-3 दिन के बाद ही स्वास्थ्य मंत्री विजयभास्कर उनके पास आए और कहा कि दिवाकरन (शशिकला के भतीजे) चाहते हैं कि शशिकला महासचिव बनें।

चेन्नई में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी उठापटक के बीच शशिकला को चुनाव आयोग से भी झटका लगा है। आयोग ने एक शिकायत के आधार पर पूछा है कि शशिकला को एआईएडीएमके का अंतरिम महासचिव बनाए जाने में नियमों का पालन नहीं किया गया? आयोग ने इस संबंध में तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी को दो फरवरी को नोटिस जारी करते हुए शशिकला को महासचिव बनाने के जुड़े प्रस्ताव की कॉपी सहित दूसरे विवरण मांगे हैं। हालांकि इसके लिए कोई तिथि तय नहीं की गई है।चुनाव आयोग ने एआईएडीएमके से शशिकला पुष्पा की शिकायत पर जवाब मांगा । शशिकला पुष्पा ने पार्टी महासचिव की नियुक्ति सवाल उठाये थे। गौरतलब है कि तमिलनाडु में एआईएडीएमके की आमसभा में पार्टी महासचिव पद के चुनाव को लेकर हंगामा खड़ा हो गया था, जब पार्टी महासचिव पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर शशिकला पुष्पा के पति लिंगेश्वर थिलेगन, उनके वकील व समर्थक पर्चा दाखिल करने पार्टी के दफ्तर पहुंचे थे।

अब जिस पार्टी और राजनीति को अम्मा ने सजा सवांर कर एक किया था अब कुर्सी की लड़ाई ने पार्टी में दो फाड़ कर दिया है। एक समय में पन्नीरसेल्वम और शशिकला की एकजुटता अब टूट गई है, अब सवाल यह है कि आखिरकार तमिलनाडु को जिस तरह से अम्मा ने एकजुट करके रखा था, क्या आने वाले समय में नेता उसी एकजुटता को बनाए रख पाएंगे, मौजूदा राजनीति को देखते हुए अब कुछ भी कह पाना सही ना होगा। हालांकि अब जो भी होगा मजेदार जरुर होगा।

 -अभिलाष श्रीवास्तव