जानिए: IPL 10 के फाइनल में कौन सी पहेली कर रही है खिलाड़ियों और दर्शकों का इंतजार

नई दिल्ली। आखिरकार आइपीएल 10 अपने आखिरी सफर तक आ ही पहुंचा और यहां पर सबसे बड़ी पहेली दर्शकों और खिलाड़ियों का इंतजार कर रही है। फाइनल हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की पिच पर खेला जाएगा और इस पिच को सबसे अच्छे तरीके से समझने वाली टीम फाइनल में नहीं होगी और टीम कोई और नहीं खुद हैदराबाद है।

बता दें कि इस आइपीएल में इस मैदान पर सात मैच हुए हैं, जिसमें से हैदराबाद ने छह मैच जीते थे और एक मैच में पुणे की टीम ने यहां हैदराबाद को हराया था। इसका मतलब पुणे की टीम इस मैदान पर अतिरिक्त आत्मविश्वास के साथ उतरेगी। हालांकि, उसकी राह भी इतनी आसान नहीं होगी। क्योंकि इस आइपीएल में इस मैदान पर 200 से ज्यादा के स्कोर दो बार बने हैं, एक बार 190 से ज्यादा का स्कोर बना है और दो बार 130 और 140 से कम से स्कोर भी बने हैं। यानी किस दिन पिच कैसा बर्ताव करेगी, यह मौसम के अलावा भी निर्भर करता है और इसका अनुमान सिर्फ टॉस के समय पिच देखकर लगाना आसान नहीं होगा।

मैच 1- 5 अप्रैल को आइपीएल के उद्घाटन मैच में हैदराबाद ने बैंगलोर के खिलाफ खेलते हुए 20 ओवर में 207 रनों का स्कोर खड़ा किया था। बैंगलोर ने विराट कोहली और डिविलियर्स के बिना 19.4 ओवर में 172 रन बनाए थे और 35 रनों से मैच हार गई थी। यानी पहले मैच में खूब रन बरसे थे, हालांकि बैंगलोर के कप्तान शेन वॉट्सन ने विकेट धीमा होने की बात कही थी।
मैच 2- 9 अप्रैल को गुजरात की टीम पहले खेलते हुए 20 ओवर में केवल 135 रन ही बना सकी थी। गुजरात के कप्तान सुरेश रैना ने कहा था कि पिच धीमी होने की वजह से उनके रन कम बने। हैदराबाद ने 15.3 ओवर में 140 रन बनाकर 9 विकेट से मैच जीता।
मैच 3- 17 अप्रैल के इस मैच में हैदराबाद ने 20 ओवर में 159 रन बनाए थे और पंजाब की टीम 154 रनों पर आउट हो गई थी। इस पिच के सूखे, धीमा और टू-पेस्ड (असमान गति) होने की शिकायत की गई थी। पंजाब के कप्तान मैक्सवेल ने कहा था कि उन्हें पिच के इतना असमान होने की उम्मीद नहीं थी।
मैच 4- 19 अप्रैल को इस पिच पर हुए मैच में हैदराबाद ने दिल्ली के खिलाफ 191 रन बनाए थे और दिल्ली ने जवाब में 176 रन बनाए थे। इस मैच में दोनों कप्तानों ने पिच की तारीफ की थी।
मैच 5- 30 अप्रैल को हैदराबाद ने कोलकाता के खिलाफ खेलते हुए 209 रन बनाए और शतकवीर वॉर्नर ने पिच की तारीफ की थी। कोलकाता की टीम 20 ओवर में 161 रन ही बना सकी थी।
मैच 6- 6 मई के मैच में पुणे ने पहले खेलते हुए धीमी पिच पर 148 रन बनाए। इसके जवाब में हैदराबाद की टीम केवल 136 रन ही बना सकी।
मैच 7- 8 मई का मैच भी धीमी पिच पर लो स्कोरिंग रहा था और मुंबई की टीम 20 ओवर में केवल 138 रन ही बना सकी थी। हैदराबाद की टीम को भी 19वें ओवर में जीत मिली थी।

इस तरह सात मैचों में से तीन मैच हाइ स्कोरिंग (पहला, चौथा और पांचवां मैच) रहे हैं, तीन मैच लो स्कोरिंग (दूसरा, छठा और सातवां मैच) रहे हैं और एक मैच ठीकठाक स्कोरिंग (तीसरा) वाला रहा, लेकिन उस मैच में भी पिच को लेकर शिकायत सामने आई थी। ऐसे में फाइनल के दिन भी इस पिच पर असमान उछाल और धीमी गति से आती गेंदें देखने को मिले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए और फाइनल जीतने की उम्मीद करने वाली टीम को इसके लिए तैयार भी रहना चाहिए।