भारत-अमेरिका सैन्यभ्यासः मजबूत होती युद्धकुशलता

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के सैनिक के बीच उत्तराखंड में जारी सैन्य अभ्यास दोनों देशों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। जहां दोनों देश एक दूसरे सेनाओं को लड़ने के गुण सिखा रहे हैं, वहीं दोनों देशों के सेनाओं के बीच मैत्रीपूर्णभाव से युद्धाभ्यास देखने को मिला है। उत्तराखंड के चौबटिया के घने जंगलों में पिछले दो हप्तों से दोनों देशों के बीच युद्धाभ्यास जारी है, करीब 6 हजार से 8 हजार की फीट की ऊंचाई पर आतंकवाद विरोधी अभियान में दोनों देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।

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भारत अमेरिका सैन्यभ्यास के दौरान लड़ाई के साथ साथ दोनों देश एकदूसरे के रणनीति और कार्रवाई करने के पैंतरे भी सीख रहे हैं। ये अभ्यास दोनों सेनाओं के लिए रेड, कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन में काफी मददगार साबित होगा, इस दौरान स्टेट ऑफ द आर्ट उपकरण के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

मसलन सर्विलांस के उपकरण के इस्तेमाल की कला, आतंकवादियों पर नजर रखना, उनकी पहचान करना और नजदीकी लड़ाई में कैसे विशेष हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकियों का मार गिराया जाए जैसी चीजें शामिल हैं।

इस अभ्यास का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच सूचनाओं की अदला बदली कर ऑपरेशनों में लड़ने की अपनी क्षमता को बढ़ाना है।अनुभवों के हिसाब से देखा जाए तो दोनो देश अलग अलग तरह के अनुभवों के साथ परिपक्व है, अमेरिका के पास जहां अफगानिस्तान और इराक में आतंकवाद से निपटने का अनुभव है वहीं भारतीय सेना भी आतंकवाद से लडने का अनुभव रखती है। दोनों देशों के अनुभवों का संप्रेषण निश्चित ही आने वाले समय में फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

भारत और अमेरिका के बीच हुए लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट समझौते ने दोनो देशों को युद्ध कुशल बनाने के लिए जो पहल की है भविष्य मे उसके उज्जवल परिणाम देखे जा सकेंगे। इस समझौते के तहत अमेरिकी और भारतीय सेना के एक दूसरे के बीच लॉजिस्टिक, सप्लाई और सर्विस में मदद करेगी, दोनों देश एक-दूसरे के युद्धक बेड़ों से ईंधन, पानी और भोजन जैसे संसाधनों की शेयरिंग कर सकेंगे जिससे दोनों देशों को लाभ मिलेगा