भारत के विरोध से पीओके में चीन के खिलाफ प्रदर्शन

भारत और चीन के बीच कैसे संबध हैं ये तो सभी जानते हैं दोनों एक दुसरे को घेरने का एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं। भारत ने चीन में आयोजित हाई—प्रोफाइल बेल्ट एंड रोड फोरम का बहिष्कार करके पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर से गुजर रहे विवादित आर्थिक गलियारे के खिलाफ अपने विरोध को एक नया मुकाम दिया है। OBOR फोरम में भारत के न जाने से चीन के खिलाफ सीपीईसी को लेकर रानायिक दबाव बढ़ा है। हालांकि बीजिंग ने सम्मेलन में भारत को शामिल करने हर मुमकिन कोशिश की थी। जहां पीओके को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ।

 

बता दें कि चीन की राजधानी बीजिंग में वन बेल्ट वन रोड सम्मेलन शुरू होने के साथ ही भारत में सीपीईसी का विरोध तेज हो गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान में इस योजना के अंदर आने वाले चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रोजेक्‍ट को लेकर जमकर विरोध-प्रदर्शन हुआ।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन के खिलाफ गिलगित और बाल्टिस्तान वाले इलाकों में सैकड़ों छात्रों और राजनीतिक संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया। संगठनों में कराकोरम स्‍टुडेंट्स ऑर्गनाइजेशन, बलवारिस्‍तान नेशनल स्‍टुडेंट्स ऑर्गनाइजेशन, गिलिगित बाल्टिस्‍तान यूनाइटेड मूवमेंट और बलवारिस्‍तान नेशनल फ्रंट शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग इस प्रोजेक्‍ट को गिलगित में अवैध कब्जे की कोशिश बता रहे हैं।

साथ ही भारत द्वारा किए गए बहिष्कार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने नयी दिल्ली के कदम पर अप्रत्यक्ष चुटकी लेते हुए कहा कि अरबों डॉलर की लागत से बन रहा चीन—पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) एक आर्थिक परियोजना है, जो क्षेत्र के सभी देशों के लिए खुला है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं नवाज शरीफ, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन और तुकीर के राष्ट्रपति रजब तैयब एदोर्आन सहित दुनिया के विभिन्न नेताओं ने सम्मेलन में भाग लिया। इसका उदघाटन चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने किया। अमेरिका ने राष्ट्रपति के विशेष सहायक और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में एशिया के लिए वरिष्ठ निदेशक मैट पॉटिंगर के नेतत्व में शिष्टमंडल को सम्मेलन में भेजा है।
चीन को भारत के बहिष्कार का अंदाजा पहले ही हो गया था, शायद इसी कारण उद्घाटन समारोह के सीधे प्रसारण के दौरान इस हाई—टेक सभागार में भारत के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं दिखी। हालांकि, इस समारोह में कुछ थिंक टैंक की ओर से भारतीय विद्वानों ने भाग लिया और समूह चचार्ओं में भी हिस्सा लिया।