भारत और जापान स्वाभाविक साझेदार: अमेरिका

बंगाल की खाड़ी में सोमवार को संयुक्त नौ सैनिक अभ्यास शुरू होने से पहले अमेरिका ने भारत और जापान को अपना स्वाभाविक साझीदार बताया है। यह जानकारी सोमवार को मीडिया रिपोर्ट से मिली है। एक सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाले इस संयुक्त अभ्यास को वाशिंगटन में हिन्द महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हर साल होने वाले इस अभ्यास में विमानवाहक पोत, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और जंगी जहाज़ हिस्सा लेंगे।


विदित हो कि यह अभ्यास 1992 से शुरू हुआ और तब से लगातार जारी है। इस अभ्यास का मकसद तीनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य ऑपरेशन के दौरान बेहतर तालमेल बनाना है। यह अभ्यास अगले दस दिनों तक चलेगा जिसमें तीनों देशों की सेनाओं की ताकत और अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन होगा।इस अभ्यास में भारत की ओर से सबसे बड़ा विमानवाहक पोत विक्रमादित्य की अगुवाई में छह से सात युद्धपोत और एक पनडुब्बी शामिल होगी। विक्रमादित्य पर मिग-29 के लड़ाकू विमान होंगे। वहीं, अमेरिका की ओर से एक लाख टन वजन वाले विमानवाहक पोत निमित्ज के साथ-साथ तीन से चार विध्वसंक (डिस्ट्रॉयर ) और परमाणु पनडुब्बी शामिल होंगी।

अमेरिकी विमानवाहक पोत एफ -18 लड़ाकू विमान से लैस होंगे। उधर, जापान 27 हजार टन वजनी हेलिकॉप्टर कैरियर इजुमो के अलावा और भी कई युद्धपोत के साथ संयुक्त नौ सैनिक अभ्यास में शामिल हो रहा है। इस बार ‘एन्टी सबमरीन ऑपरेशन’ युद्धाभ्यास का फोकस है। हिंद महासगार के बंगाल की खाड़ी में हो रहे इस युद्धभ्यास पर चीन की काफी टेढ़ी नजर है। वह हमेशा इसे संदेह की नजर से देखता है। उसे लगता है यह दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में उसकी पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।