गाजियाबाद निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी की जीत मानी जा रही है पक्की, डूब सकती है विरोधियों की लुटिया

गाजियबाद। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में गाजियाबाद निकाय से बीजेपी की जीत पक्की मानी जा रही है। गाजियाबाद से बीजेपी प्रत्याशी आशा शर्मा के प्रचार को देखकर बाकि पार्टियों के उम्मीदवारों ने अपने हथियार मतदान से पहले ही डाल दिए हैं। दिल्ली से जुड़े होने के कारण गाजियाबाद का चुनावी समिकरण दिल्ली पर भी अपना असर डाल रहा है। गाजियाबाद से बीजेपी ने आशा शर्मा, बसपा से मुन्नी चौधरी और सपा ने राखी गर्ग को अपना उम्मीदवार बनाया है। इनमे से आप प्रत्याशी डोली शर्मा और राखी चौधरी पहली बार राजनीति में हाथ अजमा रही है, जबकि आशा शर्मा बीजेपी संगठन से जुड़ी हुई है।

बीजेपी  प्रत्याशी के पति ग़ाज़ियाबाद स्थित एक निजी कम्पनी में वरिष्ठ अधिकारी थे साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काफ़ी लोकप्रिय है। आशा शर्मा को अपने राजनीतिक अनुभव और आपने पति कि सामाजिक छवि का विशेष लाभ मिल रहा, बीजेपी संगठन के अलावा कई सामाजिक संस्थाएँ व ट्रान्स हींडन में कई रेज़िडेंट वेल्फ़ेर असोसीएशन चुनाव प्रचार में लगी हुई है। बीजेपी की परम्परागत सीट है, बीजेपी अपने बुरे वक़्त में भी यहाँ से जीती है।

शहर के लोगों का मानना है की यदि बीजेपी का प्रत्याशी यहाँ से जीतता है तो देश व प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने का लाभ ग़ाज़ियाबाद को मिल सकता है। अधिकतर मतदाताओं का मानना है कि कोंग्रेस का संगठन है ही नहीं सिर्फ़ पिता और बेटी चुनाव लड़ रहे है, बसपा के अधिकतर लोग या तो पार्टी छोड़ चुके है या निष्क्रिय है,सपा प्रत्याशी स्थानीय संगठन की पसन्द का ना होने के कारण संगठन रुचि नहीं ले रहा, इसलिए लोग बीजेपी की जीत यहाँ से निश्चित मान रहे है।