साल 2016 में कांग्रेस को लगा उत्तराखण्ड में सबसे बड़ा झटका

केंद्र की सत्ता से सपूड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस द्वारा लगातार राज्यों की सत्ता पर काबिज होने के लिए जद्दोजहद की जा रही है। कांग्रेस के लिए साल 2016 काफी उठा-पटक भर रहा। विशेषकर उन राज्यों में जहां पर चुनाव है कांग्रेस के लिए य़ह साल बेहद ही खराब रहा। यूपी में साल 2017 का रण जीतने के लिए कांग्रेस रणनीति बनाती रही, तो दूसरी तरफ उत्तराखण्ड जहां पर उसकी सरकार पहले से ही थी वहां पर कांग्रेस को झटका लगा। पार्टी से 9 नेताओं ने बगावत कर दी। राजीनिक उतार-चढ़ाव देख रही कांग्रेस को एक झटका लगा की उसके पार्टी के 9 नेताओं ने उससे बगावत भी की और उसकी विपक्षी पार्टी में जाकर शामिल हो गए।

5 घंटे के बाद लिया गया फैसला:-

कांग्रेस का दामन छोड़, बीजेपी में शामिल होने का फैसला तो बागी नेताओं ने ले लिया लेकिन बीजेपी उनको अपने परिवार का हिस्सा बनने देगी या नहीं इस पर 5 घंटे विचार-विमर्श किया गया। बीजेपी के उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी, सतपाल महाराज की लंबी वार्ता के बाद दोनों नेताओं को बीजेपी में शामिल करने की मंजूरी मिली। बीजेपी के इस फैसले को विधानसभा चुनाव में एक हुकूम के इक्के की तरह देखा गया।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला:-

बागी नेता पार्टी में शामिल तो हो गए लेकिन उन पर नैनीताल हाईकोर्ट ने वोटिंग में हिस्सा लेने के लिए रोक दी। हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए बागी नेताओं को फ्लोर टेस्ट में शामिल होने का मौका दिया था।

किसे नफा, किसे नुकसान:-

प्रदेश की सियासत में ऐसा पहली बार हुआ जब बीजेपी ने 9 बागी नेताओं को शामिल कर लिया। इसके पीछे बीजेपी की रणनीति यह रही कि पार्टी को लगा कि जब सत्तारूढ़ पार्टी के नेता ही उसके खिलाफ बोलेंगे तो उन्हें फायदा होगा। जो नेता सरकार का हिस्सा रह चुके हैं वो सरकार की कमजोरियां भी जानते हैं वो जब जनता के सामने हरीश रावत की स्थिति का बखान करेंगे तो जनता के दिलों में जो भी हरीश रावत के लिए सहानुभूति होगी वो खत्म हो जाएगी। वैसे भी जिस तरह से चुनावी तारीखें करीब आ रही है वैसे-वैसे योजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा है, उसे देखकर तो यही लगता है बीजेपी की छवि को देखते हुए सूबे की सरकार डर गई है।

बीजेपी में 9 बागी नेताओं के शामिल होने के बाद कांग्रेस को सीधे नुकसान होगा। अगर बीजेपी बागियों को टिकट देती है तो कांग्रेस के पास बोलने के लिए कुछ बाकि नहीं जाएगा। बागी नेता कांग्रेस के खिलाफ रण में उतरेंगे और बगावत की आग रण के मैदान में उगलेंगे, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा। जनता के दिलों में कल तक कांग्रेस की छवि के जरिए बीजेपी के लिए काम करेंगे।