कामसूत्र और कामक्रीड़ा को सीखना है तो भारत में यहां पर घूमने जरूर जायें

नई दिल्ली। सेक्स और उससे जुड़ी बातें भारतीय परिवेश में गलत मानी जाती हैं। लेकिन अब देश के साथ यहां के लोगों की सोच भी बदल रही है। लेकिन वास्तविकता ये नहीं है, कि कामकला पश्चिमी देशों की देन है। बल्कि भारतीय प्राचीन सभ्यता में काम को एक क्रीड़ा या कला के तौर पर देखा जाता रहा है। इसकी लिए यहां पर स्त्री और पुरूष के बीच होने वाले इस शारीरिक मिलन को लेकर किताबों के साथ मूर्तियों और मंदिरों में भी स्थान दिया गया है। माना जाता है जब स्त्री और पुरूष कामक्रीड़ा में मग्न होते हैं तो वे अर्धनारीश्वर का रूप हो जाते हैं।

Kamasutra,Kamkrida
learn Kamasutra and Kamkrida

भारतीय सभ्यता और काम कला
आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जो स्थान भारत ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी उस कला के कारण जाना जाता है जिसकी वजह से लोग देश ही नही विदेशों के कोने-कोने से वहां खिचे चले आते हैं। ये स्थान है भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का खजुराहो। बीते जमाने में ये स्थान खजूर के जंगल के लिए जाना जाता था। लेकिन आज कामुक मूर्तियों से सजे प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।इन मूर्तियों में कामकला को भारतीय परिवेश के साथ एक क्रीड़ा के तौर पर दिखाया गया है।

Kamasutra,Kamkrida
learn Kamasutra and Kamkrida

खजुराहो हो काम क्रीड़ा का अनुपम उदाहरण
लेकिन खजुराहो आज खजूर के वन नहीं बल्कि कामुक मूर्तियों से सजी मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां के मंदिरों के बाहर कामक्रीड़ा की ये प्रतिमा यहां आने वालों को आश्चर्य में डाल देती है। क्योंकि यहां पर आत्मशांति और मुक्ति के मार्ग पर काम और भोग की ये कलाकृतियां लोगों को अपने और खींचती हैं। इसके साथ ही भारतीय जीवन शैली में कामक्रीड़ा के बृहद विस्तार का उल्लेख देखने को मिलता है। इसके साथ ही ये साबित होता है कि भारतीय परिवेश में कामक्रीड़ा पूर्व के कालों में एक बड़ा ही रोचक विषय था।

Kamasutra,Kamkrida
learn Kamasutra and Kamkrida

भारतीय जीवन में काम कला
इन मंदिरों का निर्माण भी इसी तरह की एक रोचक कथा से होता है। कथा आती है कि एक हेमावती नाम की सुन्दर ब्राह्मण कन्या थी जिसके सौन्दर्य को देख चन्द्रमा मोहित हो जाता है। वह एक बार वन में एक सरोवर में स्नान करने के लिए जाती है जहां रात्रि में चांदनी विखेरता हुए चन्द्रमा उसके अद्वितीय स्वरूप के रस का पान करता रहा । चन्द्रमा ने उसे अपने वशीभूत कर उसके साथ वन में कामक्रीड़ा के सारे स्वरूपों के साथ उसके सौन्दर्य का रसपान किया।

Kamasutra,Kamkidra
learn Kamasutra and Kamkidra

कैसे हुआ इस मंदिर का निर्माण
चन्द्रमा और हेमवती के बीच बने इन संबंधों से एक बालक का जन्म हुआ। लेकिन समाज इन संबंधों के स्वीकार नहीं कर सका और उसने हेमावती के साथ बाकल को अपनाने से मना कर दिया। इसके बाद उस बालक का पलन-पोषण हेमावती को वन में रहकर ही करना पड़ा था। बालक का नाम हेमावती ने चन्द्रवर्मन रखा था।

Kamasutra,Kamkidra
learn Kamasutra and Kamkrida

बड़े होने पर चन्द्रवर्मन ने अपना राज्य स्थापित किया। इसके बाद अपनी मां हेमावती की प्रेरणा और इच्छा पर एक ऐसे मंदिर का निर्माण कराया जो जिसकी दीवारों पर कामक्रीड़ा के सभी स्वरूपों का उल्लेख किया गया । क्योंकि मनुष्य के जीवन का आधार जिस चीज पर निर्भर करता है वो उससे ही भागता है। लेकिन काम एक क्रीड़ा है और एक कला जिसको जानने और जीवन से मानसिक और शारीरिक सुख प्राप्त होता है।

Kamasutra,Kamkrida
learn Kamasutra and Kamkrida

खजुराहो के निर्माण का उद्देश्य
इसके साथ ही उस काल में बौद्धों का बड़ा ही महत्व बढ़ गया था। गौतम बुद्ध के उपदेशों के चलते लोग कामकला से दूर होते जा रहे थे। जिसके चलते जीवन में रस का महत्व कम होता जा रहा था। इसलिए इन मंदिरों का निर्माण करते वक्त इनकी दीवारों पर मनुष्य के उन उद्देश्यों के चित्रित किया जिससे मानव जीवन में रस आता है। वास्तव में कामक्रीड़ा के महत्व को ही दिखाने के लिए इस तरह के मंदिरों का निर्माण किया गया था।

Kamasutra,Kamkrida
learn Kamasutra and Kamkrida

इसके साथ ही इन मंदिरों में कामक्रीड़ा के दृश्यों का उल्लेख इसलिए भी किया गया था, कि उन दिनों भारतीय शिक्षा पद्धति में गुरूकुल की प्रणाली होती थी। ऐसे में छात्र को हर कला में पारंगत होना होता था। शास्त्र के साथ शस्त्र के अलावा अन्य कलाओं में छात्र को शिक्षा दी जाती थी। जीवन के आधार की सबसे बड़ी कला कामक्रीड़ा या काम कला है ऐसे में छात्र कैसे काम क्रीड़ा को सीख सकता है। इस कला के सभी प्रावधानों और विधानों को सचित्र वर्णित करने के लिए भी इस अद्भुत मंदिर का निर्माण किया गया है।