रुड़की में अगर डिजिटलीकरण नहीं ताे अब राशन भी नहीं

रुड़की। यूं तो पिछले लंबे अरसे से केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिये राशन कार्डों के डिजिटलीकरण का कार्य खाद्य आपूर्ति विभाग के माध्यम से किया जा रहा है लेकिन विभाग की ढुलमुल कार्यशैली के चलते अभी तक कार्डो के डिजिटलीकरण का काम महज बीस फीसदी ही हो पाया है।

रुड़की के खाद्य आपूर्ति विभाग के अंतर्गत मंगलौर,लंढौरा,भगवानपुर, नारसन,कलियर, झबरेड़ा और रुड़की क्षेत्र आता है जहाँ लगभग दो लाख कार्डधारक निवास करते है केंद्र सरकार के राशन कार्डों को आधार से लिंक करने के आदेश के बाद राशन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है इसका असर खाद्य आपूर्ति विभाग के उन अफसरों पर भी पड रहा है जो राशन माफियाओं के साथ साठगाँठ रखते है और अब तक गरीबो के राशन पर डाका डालते रहे है।

रुड़की के खाद्य आपूर्ति विभाग के आपूर्ति अधिकारी का कहना है कि अब आगामी 31 मार्च की समय सीमा तय कर दी है अगर कार्ड धारक इस डेडलाइन तक राशन कार्ड में शामिल परिवार के मुखिया सहित सभी परिजनों के आधार कार्ड विभाग में जमा नहीं करते तो 1 अप्रैल से राशन मिलना बंद हो जाएगा। क्षेत्र के लोग सरकार की इस योजना को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में तो देख रहे है पर साथ ही सम्बंधित विभाग की ढुलमुल कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रहे है अब ये आने वाला समय बताएगा कि विभाग ईमानदारी से तय समय सीमा में कार्डो का डिजिटलीकरण कर पाता है या अपनी धीमी गति को ही अपनाए रखता है। 

 -शकील अनवर